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गन्ना किसानों के आंदोलन पर सीएम शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा तत्काल हस्तक्षेप

गन्ना किसानों के आंदोलन पर सीएम शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा तत्काल हस्तक्षेप
गन्ना किसानों के आंदोलन पर सीएम शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी से मांगा तत्काल हस्तक्षेप

बेंगलुरु, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गन्ना किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने इसका कारण उत्तरी कर्नाटक में विरोध प्रदर्शनों के कारण गन्ना पेराई का मौसम शुरू होने में देरी बताया है।

सोमवार को लिखे अपने तीन पृष्ठ के पत्र में, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने केंद्र से पांच प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया, जिनमें चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) में संशोधन, घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग-अलग मूल्य निर्धारण, गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद और मूल्य निर्धारण में बदलाव, और उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) निर्धारित करने के लिए आधार वसूली दर को 9.50 प्रतिशत पर बहाल करना शामिल है।

उत्तरी कर्नाटक के गन्ना किसान विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास का घेराव करने के इरादे से विभिन्न शहरों से हुबली की ओर पदयात्रा निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर सड़क अवरोध की भी खबरें आई हैं।

कर्नाटक हाई कोर्ट ने जोशी के आवास पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर का दौरा किया और प्रदर्शनकारी किसानों से अपनी पदयात्रा रद्द करने की अपील की। ​​हालांकि, किसानों ने कहा कि उनकी मुख्य मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं और वे केंद्र सरकार से आश्वासन मिले बिना आंदोलन वापस नहीं लेंगे।

स्थिति को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि उत्तरी कर्नाटक में पेराई का मौसम शुरू नहीं हुआ है, जिससे पके हुए गन्ने खेतों में खड़े रह गए हैं।

उन्होंने कहा कि हर दिन की देरी से गन्ने के वजन और चीनी की मात्रा में नुकसान हो रहा है। लगातार सड़क जाम से सार्वजनिक व्यवस्था भी बिगड़ रही है और आम जनता को काफी परेशानी हो रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध सभी उपाय किए हैं।

27 नवंबर, 2023 के एक सरकारी आदेश के तहत, कानूनी माप विभाग ने चीनी मिलों के वजन मापने वाले पुलों में अनियमितताओं को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया जारी की थी और सभी मिलों को इसका पालन करने का निर्देश दिया गया था।

सभी 81 चालू मिलें एनालॉग से डिजिटल लोड सेल में स्थानांतरित हो गई हैं। 2025-26 सत्र के दौरान प्रत्येक मिल में कम से कम महीने में दो बार चीनी उत्पादन और गन्ने के वजन का निरीक्षण करने और राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए जिला स्तरीय टीमों का भी गठन किया गया था।

इन उपायों से चीनी की औसत रिकवरी दर 2022-23 में 9.91 प्रतिशत से बढ़कर 2025-26 में 11.09 प्रतिशत हो गई। सभी मिलों को राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से अपनी रिकवरी परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए मान्यता प्राप्त करने का निर्देश भी दिया गया था।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी आदेश के माध्यम से 2025-26 सत्र के लिए मिलों द्वारा तय की गई कीमत से 100 रुपए प्रति टन अतिरिक्त सुनिश्चित किया है। इस अतिरिक्त राशि में से 50 रुपए प्रति टन राज्य सरकार ने अपने कोष से वहन किया है और लगभग 290 करोड़ रुपए सीधे किसानों को भुगतान किए गए हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि किसानों की मुख्य मांगों का समाधान केवल केंद्र सरकार ही कर सकती है। कर्नाटक ने 14 अक्टूबर को केंद्र सरकार द्वारा गठित उस समिति का स्वागत किया, जिसकी अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने की थी। इस समिति का गठन गन्ना किसानों और चीनी क्षेत्र से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए किया गया है।

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने कहा कि राज्य पूरी तरह से भाग लेगा और अपने आंकड़े साझा करेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि समिति अपना काम जारी रखते हुए भी तत्काल निर्णय लेना आवश्यक है।

--आईएएनएस

एमएस/

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