कर्नाटक में मतदाता सूची संशोधन पर विवाद, डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग से मांगा अधिक समय
बेंगलुरु, 29 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के सत्यापन के लिए अधिक समय देने और दावे एवं आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने चुनाव आयोग से यह भी सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि कोई भी वास्तविक मतदाता मतदाता सूची से बाहर न हो।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर डीके शिवकुमार का पत्र साझा करते हुए कहा कि कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया के जरिए बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है और मुख्यमंत्री ने इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर चिंता जताई है।
मुख्यमंत्री ने 25 अगस्त को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में बताया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं को एएसडीडीओ श्रेणी में रखा गया है। पत्र के मुताबिक, कर्नाटक के कुल 5.54 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.08 करोड़ मतदाता इस श्रेणी में शामिल किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि 24 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद करीब 43.8 लाख मतदाताओं को तार्किक विसंगतियों या वर्ष 2002 की मतदाता सूची से लिंक न होने के कारण सत्यापन नोटिस भेजे जाने की संभावना है।
शिवकुमार ने विशेष रूप से बेंगलुरु का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अकेले 46.88 लाख मतदाता एएसडीडीओ श्रेणी में रखे गए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय पर दावे दाखिल नहीं किए गए तो लगभग 1.5 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि "अनुपस्थित" श्रेणी में शामिल कई लोग वास्तविक मतदाता हो सकते हैं, जो नौकरी, स्वास्थ्य या अन्य कारणों से गणना प्रपत्र जमा नहीं कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मतदाता जिन्होंने अपना निवास या मतदान केंद्र बदला है और बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) की घर-घर सत्यापन प्रक्रिया से छूट गए हैं, उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा, "स्थान परिवर्तन किसी व्यक्ति को मताधिकार से वंचित करने का कारण नहीं बनना चाहिए।"
शिवकुमार ने चुनाव आयोग के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं। इनमें दावे दर्ज कराने की अवधि बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में वार्ड समिति और ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामसभा बैठकों का आयोजन सुनिश्चित करना, मतदाताओं को जवाब देने के लिए तीन से चार सप्ताह का पर्याप्त समय देना तथा अधिक एएसडीडीओ मामलों वाले जिलों में अतिरिक्त अधिकारियों की तैनाती शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामसभा और वार्ड समिति बैठकों, जागरूकता अभियानों तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में चुनाव आयोग को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा, "उद्देश्य ऐसी मतदाता सूची तैयार करना होना चाहिए जिस पर कर्नाटक के लोग भरोसा कर सकें। इसमें हर पात्र नागरिक शामिल हो, अपात्र नाम हटाए जाएं और किसी भी नागरिक को केवल समय, जानकारी या अवसर की कमी के कारण मतदान अधिकार से वंचित न होना पड़े।"
--आईएएनएस
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