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कर्नाटक ने मनाया 71वां राज्योत्सव, सीएम शिवकुमार ने भुवनेश्वरी देवी को अर्पित की पुष्पांजलि

कर्नाटक ने मनाया 71वां राज्योत्सव, सीएम शिवकुमार ने भुवनेश्वरी देवी को अर्पित की पुष्पांजलि
कर्नाटक ने मनाया 71वां राज्योत्सव, सीएम शिवकुमार ने भुवनेश्वरी देवी को अर्पित की पुष्पांजलि

बेंगलुरु, 1 नवंबर (आईएएनएस)। कर्नाटक में रविवार को 71वां कन्नड़ राज्योत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूरे राज्य में नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने कन्नड़ भाषा, जमीन, पानी और संस्कृति को नमन किया।

कन्नड़ राज्योत्सव, जिसे कर्नाटक स्थापना दिवस के रूप में भी जाना जाता है, हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है। 1 नवंबर 1956 को दक्षिण भारत के सभी कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को मिलाकर राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत एक एकीकृत राज्य बनाया गया था। मूल रूप से इसका नाम मैसूर राज्य था, जिसे 1 नवंबर 1973 को कर्नाटक नाम दिया गया।

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक राज्योत्सव के अवसर पर विधान सौधा परिसर में भुवनेश्वरी देवी की मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान मंत्री मधु बंगारप्पा, मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कन्नड़ लोगों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कन्नड़ भूमि, जल, भाषा और संस्कृति का गर्व से जश्न मनाएं। उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों का जिक्र करते हुए कहा, "आप कहीं भी रहें और कुछ भी बन जाएं, हमेशा कन्नड़ बने रहें। कन्नड़ सत्य और शाश्वत है।"

उन्होंने कहा, "जो भूमि हमें पालती है वह हमें जन्म देने वाली मां से भी बड़ी है। इस शुभ दिन पर जब हमारी गौरवशाली कन्नड़ भूमि अस्तित्व में आई, तो आइए कन्नड़ की महिमा को पूरी दुनिया में फैलाएं।" उन्होंने सभी कन्नड़ लोगों को दिल से कर्नाटक राज्योत्सव की शुभकामनाएं दीं। कुमारस्वामी बेंगलुरु के जलहल्ली में एचएमटी मैदान में कर्नाटक राज्योत्सव कार्यक्रम और एचएमटी कन्नड़िगा कलाई घड़ियों के लॉन्च में भी हिस्सा लेंगे।

वहीं, मांड्या में बड़ी और मध्यम सिंचाई और मांड्या जिला प्रभारी मंत्री एन. चलुवरायस्वामी ने कहा कि कन्नड़ को सिर्फ घर में बोली जाने वाली भाषा से आगे बढ़कर ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रोजगार की भाषा बनना चाहिए।

मांड्या में जिला प्रशासन द्वारा सर एम. विश्वेश्वरैया स्टेडियम में आयोजित 71वें कन्नड़ राज्योत्सव समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री ने झंडा फहराया और कहा कि प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आधुनिक युग में कन्नड़ को मजबूत जगह मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि मांड्या, जहां राज्य में सबसे ज्यादा कन्नड़ भाषी लोगों की आबादी है, ने साहित्य और संस्कृति में बहुत योगदान दिया है। हर नागरिक को कर्नाटक की भूमि, भाषा, पानी और संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 30 लोगों को जिला कन्नड़ राज्योत्सव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मंत्री ने कहा कि सरकार मांड्या जिले के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री की मौजूदगी में जिले भर में 1793 करोड़ रुपए के 57 बड़े विकास कार्यों की शुरुआत की गई है।

राज्य में लाल और पीले रंग का कर्नाटक झंडा फहराया जाता है, छात्र और समुदाय के लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और सरकार कला, साहित्य, विज्ञान और समाज सेवा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रतिष्ठित राज्योत्सव पुरस्कार प्रदान करती है।

--आईएएनएस

वीकेयू/पीएम

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