बेंगलुरु : सात लोगों की हत्या के बाद 10 साल के बच्चे को भी मारने की थी साजिश, चाचा गिरफ्तार
बेंगलुरु, 6 नवंबर (आईएएनएस)। बेंगलुरु में अपनी पत्नी के परिवार के सात सदस्यों की कथित हत्या के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। 10 साल का एक बच्चा मौत के मुंह से बाल-बाल बच गया, जब हत्या का आरोपी उसका चाचा इंदुशेखर उसे उसी कार में अपने साथ ले गया, जिसमें उसके माता-पिता के शव बोरी में भरकर रखे गए थे।
बच्चे को यह नहीं पता था कि उसके माता-पिता की हत्या हो चुकी है और कार में रखी बोरियों में उन्हीं के शव हैं। वह आरोपी के साथ यात्रा करता रहा। पुलिस के अनुसार, आरोपी की योजना घर लौटने के बाद बच्चे की भी हत्या करने की थी।
पुलिस के मुताबिक, यह बच्चा शंकर और नलिनी का बेटा है, जो इंदुशेखर के आखिरी शिकार बने थे। आरोप है कि इंदुशेखर ने बच्चे को कुछ समय के लिए इसलिए जिंदा छोड़ा, ताकि वह रिश्तेदारों के फोन कॉल रिसीव करे और संदेश भेजे। इससे लोगों को लगे कि परिवार के सदस्य जीवित हैं और यात्रा कर रहे हैं।
सफर के दौरान बच्चे ने कार से आ रही दुर्गंध और बोरियों के बारे में इंदुशेखर से सवाल किया। इस पर आरोपी ने उसे बताया कि बोरियों में कचरा और बेकार सामान रखा है। आरोप है कि जब बच्चा सो गया, तब इंदुशेखर ने शिराडी घाट क्षेत्र में शवों को ठिकाने लगा दिया और बाद में बच्चे को लेकर बेंगलुरु लौट आया।
इस बीच, श्रीरामपुरा पुलिस स्टेशन में परिवार के लापता होने की शिकायत दर्ज हो चुकी थी। पुलिस लापता लोगों के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रैक कर रही थी। सभी फोन बार-बार आरोपी के फोन के साथ एक ही जगह दिखाई दे रहे थे। जांचकर्ता इंदुशेखर के लौटने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही वह हलसुरु इलाके में पहुंचा, पुलिस ने उसकी कार को रोक लिया और उसे हिरासत में ले लिया।
पुलिस के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के समय कार से तेज दुर्गंध आ रही थी। पुलिस ने पीड़ितों के मोबाइल फोन भी बरामद किए, जिन्हें एक बैग में साथ रखा गया था। पूछताछ के दौरान इंदुशेखर ने कथित तौर पर सात लोगों की हत्या करने की बात कबूल कर ली।
पुलिस ने बताया कि आरोपी घर पहुंचने के बाद 10 साल के बच्चे की भी हत्या करने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसने कथित तौर पर एक अन्य व्यक्ति की हत्या की भी योजना बनाई थी।
पुलिस के अनुसार, इंदुशेखर ने सबसे पहले अपनी 40 वर्षीय पत्नी सुनीता की हत्या की। इसके बाद उसने अपनी 65 वर्षीय सास रूपावती को मार डाला।
फिर उसने अपने 30 वर्षीय साले शिवकुमार, उनकी पत्नी दिव्या और उनके सात वर्षीय बेटे पुनीत की हत्या कर दी। इसके बाद आखिरी शिकार उसके दूसरे साले 40 वर्षीय शंकर और उनकी पत्नी नलिनी बने। उनका 10 वर्षीय बेटा ही इस घटना में जीवित बचा।
जांच अधिकारियों का कहना है कि इंदुशेखर ने कथित तौर पर अपनी नाबालिग बेटी को भी पत्नी की हत्या में मदद करने के लिए तैयार किया था। उस पर अपराध में सहयोग करने का आरोप है और उसे मामले में दूसरा आरोपी माना जा रहा है।
आरोपी ने कथित तौर पर शवों को पैक करने और ले जाने के लिए करीब 15 प्लास्टिक की बोरियां खरीदी थीं। पुलिस के अनुसार, पीड़ितों पर उस समय हमला किया गया, जब वे बैठे हुए थे या सो रहे थे।
आरोप है कि उनके सिर पर सिलबट्टे का पत्थर मारकर उन्हें बेहोश किया गया और फिर उनकी मौत सुनिश्चित करने के लिए उन पर और हमला किया गया।
हर हत्या के बाद आरोपी ने कथित तौर पर सिलबट्टे और घर को रसायनों से साफ किया, ताकि खून के निशान मिटाए जा सकें। शुरुआत में पुलिस को खून के सबूत ढूंढने में कठिनाई हुई, लेकिन आधुनिक फोरेंसिक उपकरणों की मदद से घर के हॉल, कमरों और रसोई सहित कई स्थानों पर खून के छींटों के निशान मिले।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इंदुशेखर ने हर हत्या की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में दो से तीन दिन का समय लिया था।
पुलिस फिलहाल हत्याओं के क्रम, नाबालिग बेटी की भूमिका और आरोपी द्वारा आगे की हत्याओं की कथित योजनाओं की जांच कर रही है।
--आईएएनएस
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