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जम्मू कश्मीर: डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल केस में राज्य जांच एजेंसी ने दाखिल की चार्जशीट, 10 आरोपी नामजद

श्रीनगर, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी ने गुरुवार को एक बड़े आतंकी साजिश मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ नाम के गुप्त नेटवर्क से जुड़े 10 आरोपियों को नामजद किया गया है। यह मामला श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
जम्मू कश्मीर: डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल केस में राज्य जांच एजेंसी ने दाखिल की चार्जशीट, 10 आरोपी नामजद

श्रीनगर, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर राज्य जांच एजेंसी ने गुरुवार को एक बड़े आतंकी साजिश मामले में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में ‘डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल’ नाम के गुप्त नेटवर्क से जुड़े 10 आरोपियों को नामजद किया गया है। यह मामला श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।

यह मामला 19 अक्टूबर 2025 की घटना से जुड़ा है, जब नौगाम इलाके में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के नाम से भड़काऊ और धमकी भरे पोस्टर लगाए गए थे।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन पोस्टरों का मकसद लोगों में डर फैलाना, कानून-व्यवस्था बिगाड़ना और भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देना था।

राज्य जांच एजेंसी के अनुसार, गहन जांच में पता चला कि यह पोस्टर अभियान एक बड़ी और सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य प्रतिबंधित संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद को फिर से सक्रिय करना था।

आरोपियों ने एक गुप्त मॉड्यूल बनाया था, जो लोगों को कट्टरपंथ की ओर ले जाने, भर्ती करने और देशभर में आतंकी हमलों की तैयारी में लगा हुआ था।

एजेंसी ने बताया कि इस समूह ने जानबूझकर जैश-ए-मोहम्मद का नाम इस्तेमाल किया, ताकि उसकी बदनामी का फायदा उठाकर लोगों में ज्यादा डर पैदा किया जा सके, जबकि असल में वे अंसार गजवत-उल-हिंद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे।

अधिकारियों के मुताबिक, यह सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने और अपनी असली योजना छिपाने की सोची-समझी चाल थी। खास बात यह है कि इस मॉड्यूल में कई पढ़े-लिखे लोग, यहां तक कि डॉक्टर भी शामिल थे, जिन्होंने अपनी जानकारी और संसाधनों का गलत इस्तेमाल किया।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उग्रवादी प्रचार फैलाया और विस्फोटक बनाने से जुड़ी सामग्री जुटाई। ये गतिविधियां घरों और अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़े स्थानों पर भी की जा रही थीं।

जांच में पता चला कि इस समूह ने ट्रायएसीटोन ट्राइपरऑक्साइड नामक खतरनाक विस्फोटक को इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी, क्योंकि इसके कच्चे सामान आसानी से मिल जाते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री जुटाने से इस साजिश की गंभीरता का अंदाजा लगता है और अगर समय रहते इसे रोका नहीं जाता तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक हो सकते थे।

राज्य जांच एजेंसी ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर पूरी जांच करते हुए इस पूरे नेटवर्क और उसके सहयोगियों को खत्म कर दिया गया है।

चार्जशीट में बरामदगी, डिजिटल फोरेंसिक जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों के आधार पर हर आरोपी की भूमिका स्पष्ट की गई है।

जिन लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उनमें आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ भट, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, इरफान अहमद वागे उर्फ ओवैस, जमीर अहमद आहंगर उर्फ मुतलाशी, डॉ. मुजामिल शकील गनई उर्फ मुसैब, डॉ. अदील अहमद राथर उर्फ जावेद, डॉ. शाहीन सईद, तुफैल अहमद भट और पुलवामा के डॉ. उमर उन नबी शामिल हैं, जो रेड फोर्ट आत्मघाती हमले में मारा गया था।

यह चार्जशीट संबंधित अदालत में दाखिल की गई है। राज्य जांच एजेंसी ने कहा कि यह मामला आतंकवादी साजिशों के बदलते और जटिल स्वरूप को दिखाता है, जिसमें पेशेवर संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है।

एजेंसी ने सतर्कता बनाए रखने और मिलकर कार्रवाई करने की जरूरत पर जोर दिया है। इस मामले में आगे की जांच जारी है।

--आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी

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