Samachar Nama
×

भारत के लिए क्वाटरनरी-लेवल इलाज की ओर बढ़ने का समय: मनोज सिन्हा

भारत के लिए क्वाटरनरी-लेवल इलाज की ओर बढ़ने का समय: मनोज सिन्हा
भारत के लिए क्वाटरनरी-लेवल इलाज की ओर बढ़ने का समय: मनोज सिन्हा

श्रीनगर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को कहा कि देश के लिए टर्शियरी हेल्थकेयर से आगे बढ़कर क्वाटरनरी-लेवल इलाज को अपनाने का समय आ गया है।

श्रीनगर में क्वाटरनरी हेल्थकेयर और रिसर्च समिट को संबोधित करते हुए सिन्हा ने कहा कि यह कार्यक्रम जम्मू-कश्मीर और भारत की हेल्थकेयर यात्रा में एक अहम मोड़ है, जहां सभी नागरिकों के लिए एडवांस्ड इलाज और रिसर्च उपलब्ध होनी चाहिए।

2020 में 'बैक टू विलेज' कार्यक्रम के दौरान अखनूर की अपनी यात्रा को याद करते हुए उन्होंने डॉक्टरों के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिन्होंने दुर्लभ बीमारियों का पता लगाने के लिए आधुनिक उपकरणों की जरूरत पर जोर दिया था।

उन्होंने कहा कि इससे छोटे जिला अस्पतालों में उपलब्ध हेल्थकेयर और असल में जरूरी हेल्थकेयर के बीच का अंतर पता चला, और इस अंतर को पाटना राष्ट्रीय प्राथमिकता है।

उपराज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की तारीफ की, जिसमें 56 करोड़ से ज्यादा नागरिकों के लिए मुफ्त इलाज, हर साल 7 करोड़ बच्चों का टीकाकरण अभियान और 37 करोड़ लोगों को ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन के जरिए देखभाल शामिल है।

उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का जिक्र किया, जिसमें 23 एम्स, 2,045 मेडिकल कॉलेज, जम्मू-कश्मीर में 2 एम्स, 10 मेडिकल कॉलेज, 2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, एक बोन एंड जॉइंट हॉस्पिटल, एक पीडियाट्रिक हॉस्पिटल, 52 नर्सिंग कॉलेज, 23 पैरामेडिकल कॉलेज और 5 फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं।

सिन्हा ने कहा कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शियरी केयर को बेहतर बनाने में सफल रहा है। लेकिन अब टर्शियरी अस्पतालों को क्वाटरनरी सेंटर्स में बदलने का समय आ गया है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एडवांस्ड केयर अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित सुविधा नहीं रहनी चाहिए।

सिन्हा ने अस्पतालों से ऐसे रिसर्च संस्थानों में बदलने का आग्रह किया जो ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, रोबोटिक और प्रिसिजन सर्जरी, एडवांस्ड जीनोमिक्स, सेलुलर थेरेपी और एआई-सपोर्टेड डायग्नोस्टिक्स करने में सक्षम हों। उन्होंने उनसे आधुनिक ऑपरेटिंग थिएटर और प्रोटॉन-बीम थेरेपी सुविधाओं जैसे विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सालाना बजट आवंटित करने को कहा। उन्होंने टेलीमेडिसिन और एआई-बेस्ड डायग्नोस्टिक टूल्स को शामिल करते हुए, जिला अस्पतालों और टर्शियरी टर्स को सीधे क्वाटरनरी-केयर संस्थानों से जोड़ने के लिए एक नया कॉरिडोर बनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन, ऑन्कोलॉजी, जीनोमिक्स और क्रिटिकल केयर के क्षेत्रों में फेलोशिप और ट्रेनिंग के मौकों को बढ़ाने की अपील की।

--आईएएनएस

एमस/

Share this story