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जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 50 आतंक पीड़ित परिवारों को दिए अनुकंपा नियुक्ति पत्र

श्रीनगर, 15 मार्च (आईएएनएस)। श्रीनगर, 15 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम उठाया। रविवार को उन्होंने 50 आतंक पीड़ितों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र सौंपे। यह कार्यक्रम श्रीनगर के लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां प्रशासन की ओर से यह पहल की गई।
जम्मू-कश्मीर: एलजी मनोज सिन्हा ने 50 आतंक पीड़ित परिवारों को दिए अनुकंपा नियुक्ति पत्र

श्रीनगर, 15 मार्च (आईएएनएस)। श्रीनगर, 15 मार्च (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम उठाया। रविवार को उन्होंने 50 आतंक पीड़ितों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति के पत्र सौंपे। यह कार्यक्रम श्रीनगर के लोक भवन ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया, जहां प्रशासन की ओर से यह पहल की गई।

उपराज्यपाल ने इस पहल को 'शरणस्थली' नाम दिया और कहा कि इसका उद्देश्य आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को रोजगार के जरिए नया सहारा देना और उन्हें दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद करना है।

कार्यक्रम के दौरान एलजी मनोज सिन्हा ने कहा कि कई आतंकवाद प्रभावित परिवार लंबे समय से सरकार की मदद का इंतजार कर रहे थे। रोजगार उपलब्ध कराकर हम इन परिवारों के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह उन्हें अपने जीवन को फिर से खड़ा करने का अवसर देगा।

उन्होंने इस अवसर को पीड़ित परिवारों के लिए ईद के तोहफे के रूप में भी बताया। एलजी मनोज सिन्हा ने कहा, "सभी परिवारों को ईद मुबारक। ये नियुक्ति पत्र न्याय, सम्मान और नई शुरुआत का प्रतीक हैं। हमें मिलकर युवाओं का मार्गदर्शन करना होगा, उन्हें सम्मान देना होगा और जम्मू-कश्मीर को बेहतर भविष्य की ओर ले जाना होगा।"

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बताया कि अब तक आतंक पीड़ितों के 400 से अधिक परिवारों को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी नियुक्तियां पूरी तरह वैध और वास्तविक हैं। अगर कहीं कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा।

मनोज सिन्हा ने कहा कि कई अन्य मामलों पर भी काम चल रहा है और प्रशासन तथा पुलिस के बीच बेहतर समन्वय के साथ प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। न्याय केवल कागजों पर लिखे शब्द नहीं होता। यह वह रोशनी है जो दिलों के अंधेरे को दूर कर उम्मीद की नई किरण जगाती है। जो परिवार लंबे समय से सरकारी समर्थन का इंतजार कर रहे थे, आज उन्हें प्रशासन ने पहचान और सहारा दिया है।

मनोज सिन्हा ने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों के दर्द का जिक्र करते हुए कहा कि 1990 के दशक से आतंकवाद ने हजारों परिवारों के सपनों और स्थिरता को छीन लिया। उन्होंने कहा कि कई पीड़ित उस समय सिर्फ 12-13 साल के बच्चे थे, जब उनके परिवारों पर यह त्रासदी आई।

उन्होंने कहा, "आज हमारा प्रयास है कि हम उनका पुनर्वास करें और उनकी समस्याओं को दूर करें। जिन मामलों में अब तक आवाज नहीं उठ पाई है, उन्हें भी अप्रैल में समीक्षा के लिए लिया जाएगा।"

मनोज सिन्हा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में जम्मू-कश्मीर की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। उनके अनुसार आज राज्य में न्याय, समानता और आत्मनिर्भरता पर आधारित एक मजबूत ढांचा तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के 16 युवाओं का चयन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएसएसी) में हुआ है और प्रदेश की टीम ने रणजी ट्रॉफी में भी जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां युवाओं और नागरिकों को सशक्त बनाने के निरंतर प्रयासों का परिणाम हैं।

सुरक्षा के मुद्दे पर मनोज सिन्हा ने दोहराया कि आतंकवाद के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है। आतंक को बढ़ावा देने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और समाज को भी ऐसे तत्वों को पूरी तरह अस्वीकार करना होगा।

--आईएएनएस

वीकेयू/वीसी

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