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जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा, एलजी ने दिए बेहतर समन्वय के निर्देश

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा, एलजी ने दिए बेहतर समन्वय के निर्देश
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा, एलजी ने दिए बेहतर समन्वय के निर्देश

श्रीनगर, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को लोक भवन में केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा सुरक्षा स्थिति और तैयारियों का जायजा लिया। इस क्रम में एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता भी की।

बैठक में सभी उपायुक्तों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों ने भाग लिया, जिसमें समग्र सुरक्षा परिदृश्य और उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र की तैयारियों की समीक्षा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि बैठक में विभिन्न जिलों में सुरक्षा स्थिति का आकलन करने और जम्मू-कश्मीर में प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए नागरिक प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों ने उपराज्यपाल को मौजूदा स्थिति, सुरक्षा संबंधी घटनाक्रम और अपने-अपने जिलों में किए गए तैयारियों के उपायों के बारे में जानकारी दी।

यह समीक्षा बैठक केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने और यह सुनिश्चित करने के प्रशासन के प्रयासों का हिस्सा है कि जिला स्तरीय प्रशासनिक और पुलिस तंत्र उभरती चुनौतियों का जवाब देने के लिए तैयार रहे।

केंद्र शासित प्रदेश के संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत, कानून-व्यवस्था, पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा सीधे उपराज्यपाल और केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019, सार्वजनिक व्यवस्था और पुलिस से संबंधित मामलों को निर्वाचित विधानसभा की विधायी और कार्यकारी शक्तियों से बाहर रखता है।

अधिनियम के अंतर्गत कार्य संचालन नियमों में किए गए बाद के संशोधनों ने पुलिस, कारागार, अभियोजन और फोरेंसिक विज्ञान विभागों पर उपराज्यपाल के प्रशासनिक नियंत्रण और निर्णय लेने के अधिकार को और अधिक स्पष्ट कर दिया है।

प्रशासनिक और सुरक्षा तंत्र में कार्यरत आईएएस और आईपीएस अधिकारियों सहित अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों की नियुक्तियां, तबादले और सेवा संबंधी मामले भी उपराज्यपाल के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

इसी प्रकार, महाधिवक्ता और विधि अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी प्रस्तावों के साथ-साथ अभियोजन संबंधी स्वीकृतियों और कानूनी अपीलों पर निर्णय लेने के लिए भी उपराज्यपाल की सहमति और अनुमोदन आवश्यक है।

सुरक्षा प्रबंधन, आतंकवाद विरोधी अभियान और आतंकी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से कार्य करने वाले उपराज्यपाल के नेतृत्व वाले प्रशासन की प्रमुख जिम्मेदारियों में से हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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