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जम्मू-कश्मीर: डोडा विधायक मेराज मलिक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पीएसए हिरासत रद्द

जम्मू, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के एकमात्र आम आदमी पार्टी (आप) विधायक महराज मलिक की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। महराज मलिक पर 2025 में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
जम्मू-कश्मीर: डोडा विधायक मेराज मलिक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, पीएसए हिरासत रद्द

जम्मू, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के एकमात्र आम आदमी पार्टी (आप) विधायक महराज मलिक की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया। महराज मलिक पर 2025 में पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी ने ओपन कोर्ट में यह घोषणा की कि मलिक की पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत हिरासत रद्द कर दी गई है।

अदालत ने हिरासत के आधारों को अमान्य करार दिया। इसके बाद 8 सितंबर 2025 से चली आ रही उनकी हिरासत समाप्त हो गई। डोडा का प्रतिनिधित्व करने वाले मलिक को कथित तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक गतिविधियों के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसमें अशांति भड़काने और अधिकारियों से टकराव करने के आरोप शामिल थे।

18 से ज्यादा मामले/पुलिस रिपोर्टों का हवाला दिया गया और उनके खिलाफ 33 पन्नों की एक डॉसियर तैयार की गई। हालांकि, हाई कोर्ट ने पीएसए आवेदन को अनुचित पाया, और 'हैबियस कॉर्पस' याचिका को मंजूरी दे दी।

केंद्र शासित प्रदेश में पीएसए के तहत किसी मौजूदा विधायक की यह पहली हिरासत थी, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट सेवाओं का निलंबन और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

मलिक ने जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के हाई कोर्ट में 'हैबियस कॉर्पस' याचिका के जरिए इस आदेश को चुनौती दी, जिसमें उन्होंने अपनी हिरासत रद्द करने और 5 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की थी।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और अन्य नेताओं ने इस हिरासत की आलोचना की थी। अब कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मलिक को रिहा किया जाएगा।

कोर्ट में विधायक की पैरवी कर रहे वकीलों ने बताया कि कोर्ट ने मलिक की हिरासत को चुनौती देने वाली 'हैबियस कॉर्पस' याचिका पर सुनवाई के बाद, जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत जारी हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया।

हिरासत को चुनौती देने वाली यह याचिका हाई कोर्ट में कई तारीखों पर सुनवाई के लिए आई थी। इस साल 23 फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

--आईएएनएस

पीएसके

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