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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, रिश्ते की परिस्थितियों पर दिया ध्यान

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, रिश्ते की परिस्थितियों पर दिया ध्यान
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, रिश्ते की परिस्थितियों पर दिया ध्यान

श्रीनगर, 29 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने 'बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण' (पॉक्सो) एक्ट के तहत आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति को जमानत दे दी है।

जस्टिस संजय धर की बेंच ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि भले ही नाबालिग की सहमति की कोई कानूनी मान्यता नहीं होती, लेकिन जमानत अर्जी पर फैसला करते समय किशोरों के बीच आपसी सहमति से बने रिश्तों से जुड़ी परिस्थितियों पर विचार किया जा सकता है।

आरोपी को मगम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपहरण और रेप, और पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत आरोप लगाए गए थे।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गौर किया कि पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के सामने बयान देते हुए कहा था कि वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी, उसके साथ अच्छे रिश्ते में थी और अपनी मर्जी से शारीरिक संबंध बनाए थे।

कोर्ट ने लड़की की मां के बयान पर भी ध्यान दिया, जिन्होंने कहा था कि दोनों प्यार करते थे। उनकी बेटी अपनी मर्जी से घर से गई थी और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी उसके परिवार के साथ रह रही थी क्योंकि वह उससे शादी करना चाहती थी।

'उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनिरुद्ध और अन्य' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिग की सहमति की कोई कानूनी मान्यता नहीं है, फिर भी जमानत देने के सीमित सवाल पर विचार करते समय ऐसे रिश्तों से जुड़ी परिस्थितियों पर ध्यान दिया जा सकता है।

जस्टिस धर ने कहा कि इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत देने से इनकार करना न्याय के साथ अन्याय होगा।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया कि अभियोजन पक्ष के सभी अहम गवाहों से पूछताछ हो चुकी है, जिससे गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की संभावना काफी कम हो गई है।

इसके बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी मंजूर कर ली और साफ किया कि आदेश में की गई टिप्पणियां सिर्फ जमानत के सवाल तक ही सीमित हैं और चल रहे ट्रायल के गुण-दोष पर कोई असर नहीं डालेंगी।

'प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज' (पॉक्सो) एक्ट 2012 भारत का एक सख्त कानूनी ढांचा है जिसे 18 साल से कम उम्र के लोगों को यौन हमले, उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से बचाने के लिए बनाया गया है। यह एक जेंडर-न्यूट्रल (लिंग-निरपेक्ष) कानून है जो नाबालिग के साथ किसी भी यौन गतिविधि को अपराध मानता है, चाहे सहमति हो या न हो।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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