जम्मू-कश्मीर : राजौरी का बाल जारलान गांव एनआरएलएम के तहत बैंकिंग सेवाओं से जुड़ा, स्थानीय लोग खुश
जम्मू, 25 जून (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले का एक छोटा और दूरदराज का गांव बाल जारलान लंबे समय तक बैंकिंग सेवाओं की कमी से जूझता रहा, लेकिन पिछले कुछ सालों में हालात में जबरदस्त सुधार हुआ है। इस बदलाव में केंद्र सरकार की 'राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन' (एनआरएलएम) योजना अहम भूमिका निभा रही है।
केंद्र सरकार की प्रमुख योजना एनआरएलएम के तहत, जम्मू-कश्मीर बैंक के सहयोग से बाल जारलान गांव में स्थापित 'बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट' (बीसी) यूनिट ने ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं में बड़ा बदलाव लाया है। इस पहल ने न केवल ग्रामीणों के लिए बैंकिंग सेवाओं को आसान बनाया है, बल्कि लंबी दूरी तय करने की उनकी मुश्किलों को भी कम किया है।
बीसी यूनिट घर-घर जाकर कई तरह की सेवाएं दे रही है, जैसे खाता खोलना, कैश जमा करना और निकालना, सामाजिक सुरक्षा का लाभ, सरकारी योजनाओं से जुड़े लेन-देन और अन्य डिजिटल बैंकिंग सेवाएं।
बुजुर्ग, गरीब परिवार, छात्र, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य और इलाके के अन्य लोग इस योजना का मुख्य रूप से लाभ उठा रहे हैं।
आईएएनएस से बात करते हुए कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि कैसे इस योजना ने उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाया है।
मोहम्मद नियाज ने कहा कि पहले यहां बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं थी। हमें लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन इस सेंटर ने हमें बहुत बड़ी राहत दी है। हमें वीकेंड पर भी मदद मिल जाती है।
महिला लाभार्थी नाजिम अख्तर ने कहा कि पहले स्थानीय लोगों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने में परेशानी होती थी, लेकिन अब यहां सभी तरह की सेवाएं उपलब्ध हैं। पहले एफडी के लिए भी हमें शहरी इलाकों में जाना पड़ता था। लेकिन, आज बैंक अकाउंट, एफडी, पेंशन और इंश्योरेंस सर्विस, हर सुविधा यहीं उपलब्ध है।
वित्तीय समावेशन को मजबूत करने के अलावा, इस यूनिट ने इसे चलाने वाले स्वयं सहायता समूह सदस्यों के लिए रोजगार का एक टिकाऊ जरिया भी बनाया है।
प्रोग्राम मैनेजर कामरान हनी ने बताया कि एनआरएलएम के तहत जम्मू-कश्मीर में शुरू की गई 'बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट यूनिट' उन स्थानीय लोगों की जरूरतों को पूरा करती है, जो बैंकिंग सेवाओं से वंचित रह गए थे।
उन्होंने कहा कि हम लोगों को उनके घर पर ही सरकारी कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा सेवाओं का लाभ उठाने में भी मदद करते हैं। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
बाल जारलान में स्थित बीसी यूनिट, 'डिजिटल इंडिया' और 'वित्तीय समावेशन' के एक सफल उदाहरण के तौर पर तेजी से उभर रही है।
गौरतलब है कि एनआरएलएम गरीबी दूर करने का एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसका मकसद ग्रामीण गरीब परिवारों को 'स्वयं सहायता समूहों' (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें आर्थिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि उनकी आय में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो सके और वे घोर गरीबी से बाहर निकल सकें।
--आईएएनएस
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