जम्मू-कश्मीर विधानसभा अध्यक्ष का निर्देश, 15 दिनों में संशोधित कार नीति को अधिसूचित करे सरकार
श्रीनगर, 30 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने बुधवार को सरकार को निर्देश दिया कि संशोधित कार नीति को 15 दिनों के भीतर अधिसूचित किया जाए।
विधानसभा अध्यक्ष ने यह निर्देश 'एक अधिकारी, एक कार' नीति को लागू करने पर हुई चर्चा के दौरान दिया। उन्होंने नीति को अधिसूचित करने में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला सार्वजनिक संपत्ति से जुड़ा हुआ है।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह मुद्दा सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है और इसे अब ज्यादा समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने परिवहन मंत्री सतीश शर्मा को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जरूरी नीति को 15 दिनों के भीतर अधिसूचित कर दिया जाए।
उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इस मामले में कार्रवाई करने में करीब पांच साल क्यों लग गए। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी देरी से सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग होता है।
बता दें कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने वरिष्ठ नौकरशाहों को कई सरकारी वाहन मिलने से रोकने के लिए 'एक अधिकारी, एक आधिकारिक कार' नीति शुरू की थी।
संशोधित नीति के मुताबिक, योग्य अधिकारी को केवल एक आधिकारिक स्टाफ कार मिलेगी। अगर किसी अधिकारी के पास किसी अन्य विभाग, मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) या स्वायत्त संस्था का अतिरिक्त प्रभार भी है तो भी उसे अलग से दूसरी सरकारी कार नहीं मिलेगी।
केंद्र सरकार के अधिकारी किसी पीएसयू या स्वायत्त संस्था की स्टाफ कार का इस्तेमाल नहीं कर सकते। हालांकि, आधिकारिक रूप से मंजूर दौरे या ड्यूटी के दौरान इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
विभागों को निर्देश है कि इस्तेमाल नहीं हो रहे या अतिरिक्त वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखा जाए, ताकि उनका अनधिकृत इस्तेमाल न हो। संशोधित नीति का उद्देश्य ईंधन और वाहनों के रखरखाव पर होने वाले गैर-जरूरी खर्च को कम करना, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना है।
इस नियम से पहले कई मंत्रालयों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का अतिरिक्त या अस्थायी प्रभार संभालने वाले वरिष्ठ नौकरशाहों को अलग-अलग विभागों से स्टाफ कार मिल जाती थी।
इस वजह से एक अधिकारी के पास एक ही समय में दो या तीन सरकारी वाहन तक हो सकते थे। वित्तीय आकलन के मुताबिक, एक सरकारी वाहन के रखरखाव और सर्विस पर सालाना करीब 3.37 लाख रुपए खर्च होते हैं।
इसके अलावा, कई वाहन रखने वाले अधिकारी अक्सर हर महीने मिलने वाली 250 लीटर ईंधन की निर्धारित सीमा से ज्यादा ईंधन इस्तेमाल करते थे। कई वाहनों को मिलाकर ईंधन की खपत 750 लीटर तक पहुंच जाती थी।
आधिकारिक ज्ञापन के जरिए लागू किए गए निर्देश में मुख्य रूप से निम्न प्रावधान किए गए हैं।
अगर कोई अधिकारी अपने नियमित पद के लिए पहले से सरकारी कार का इस्तेमाल कर रहा है और उसे किसी अन्य मंत्रालय, अधीनस्थ कार्यालय या स्वायत्त संस्था का अतिरिक्त प्रभार मिलता है तो उसे दूसरी कार नहीं दी जाएगी। सभी आधिकारिक कार्यों के लिए उसे अपनी मौजूदा सरकारी कार का ही इस्तेमाल करना होगा।
सरकार के अधिकारी पीएसयू, अर्ध-सरकारी संगठन या स्वायत्त संस्थाओं की स्टाफ कार अपने पास नहीं रख सकेंगे और न ही उनका नियमित इस्तेमाल कर सकेंगे। केवल मंजूर आधिकारिक दौरे या ड्यूटी के दौरान ऐसा किया जा सकेगा।
व्यक्तिगत या अनधिकृत इस्तेमाल रोकने के लिए विभागों को सभी अतिरिक्त और इस्तेमाल नहीं हो रहे सरकारी वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखना होगा।
सरकारी वाहनों के बेहतर इस्तेमाल के साथ नीति में पुराने वाहनों को बदलने के लिए विभागों को इलेक्ट्रिक वाहन लीज पर लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है।
--आईएएनएस
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