राजस्थान जेएमएम घोटाला: एसीबी ने 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की
जयपुर, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। जल जीवन मिशन (जेएमएम) में भ्रष्टाचार के मामले में सोमवार को एंटी-करप्शन ब्यूरो ने 10 आरोपियों के खिलाफ हाईकोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
इस मामले में एसीबी ने दिनेश गोयल (मुख्य अभियंता, प्रशासन); के. डी. गुप्ता (तत्कालीन मुख्य अभियंता, ग्रामीण); सुभांशु दीक्षित (तत्कालीन सचिव, आरडब्ल्यूएसएसएम; तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य अभियंता, जयपुर जोन-II); सुशील शर्मा (तत्कालीन वित्तीय सलाहकार, नवीकरणीय ऊर्जा); निरिल कुमार (तत्कालीन मुख्य अभियंता, चूरू) और विशाल सक्सेना (कार्यकारी अभियंता, वर्तमान में निलंबित) को गिरफ्तार किया था और वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
अरुण श्रीवास्तव (अतिरिक्त मुख्य अभियंता, सेवानिवृत्त); डी. के. गौर (तत्कालीन मुख्य अभियंता और तकनीकी सदस्य, सेवानिवृत्त); महेंद्र प्रकाश सोनी (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, सेवानिवृत्त); और मुकेश पाठक (निजी व्यक्ति) पर अभियोजन के लिए एसीबी आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के लिए संबंधित विभाग को एक रिपोर्ट भेजेगी।
अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों की जांच जारी है। एसीबी की टीमें जितेंद्र शर्मा (कार्यकारी अभियंता), मुकेश गोयल (अधीक्षण अभियंता), और संजीव गुप्ता (निजी व्यक्ति) के खिलाफ जारी स्थायी वारंटों को तामील करने के लिए कई स्थानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं। उनकी संपत्तियों का विवरण संकलित कर कोर्ट के सामने पेश कर दिया गया है और जल्द ही संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
सुबोध अग्रवाल (सेवानिवृत्त आईएएस) को सोमवार को कोर्ट के सामने पेश किया गया। जांच अधिकारी महावीर शर्मा (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक) की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने दो दिन की पुलिस रिमांड मंजूर कर दी। इस मामले से संबंधित 11 रिट याचिकाओं पर उच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 21 अप्रैल को निर्धारित है।
पूर्व आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल राजस्थान में 'जल जीवन मिशन' घोटाले के सिलसिले में फरार चल रहे थे। एसीबी ने उनको पिछले गुरुवार को गिरफ्तार किया था। एसीबी की टीम अग्रवाल को दिल्ली से जयपुर लाई, जहां एसीबी मुख्यालय में पुलिस उप महानिरीक्षक ओम प्रकाश मीणा ने उनसे पूछताछ की। उनके खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था। इसी मामले में, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के नौ अधिकारियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
एसीबी के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने बताया कि 2024 में शुरू की गई इस जांच के तहत अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि तीन फरार हैं। अग्रवाल की गिरफ्तारी के साथ ही, चल रही जांच में एक अहम कामयाबी मिली है। एसीबी के अनुसार, जेजेएम की टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल समेत कई फर्मों ने कथित तौर पर जाली सर्टिफिकेट जमा करके ठेके लिए।
इन गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद, अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसका परिणाम यह हुआ कि चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए लगभग 900 करोड़ रुपए के टेंडर दिए गए। इसके अलावा, 50 करोड़ रुपए से ज़्यादा के प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी साइट इंस्पेक्शन भी नहीं किए गए, जो सरकारी पद के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।
--आईएएनएस
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