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झारखंड के रिमांड होम में मौत: एनएचआरसी ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने झारखंड सरकार और जिला पुलिस प्रमुख से देवघर जिले के चरखी पहाड़ी इलाके में स्थित एक रिमांड होम में 19 वर्षीय महिला कैदी की मौत के मामले में दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
झारखंड के रिमांड होम में मौत: एनएचआरसी ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने झारखंड सरकार और जिला पुलिस प्रमुख से देवघर जिले के चरखी पहाड़ी इलाके में स्थित एक रिमांड होम में 19 वर्षीय महिला कैदी की मौत के मामले में दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

एनएचआरसी ने 2 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में कथित तौर पर 19 वर्षीय महिला कैदी की मौत से संबंधित मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया। उसकी मौत का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। एनएचआरसी ने पाया कि यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है।

इसने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव और देवघर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

4 मई को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब कैदी की हालत अचानक बिगड़ गई, तो रिमांड होम के कर्मचारियों ने उसे देवघर सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

एक बयान में कहा गया है कि कथित तौर पर 1 जनवरी 2026 से इस रिमांड होम के पांच कैदियों की मौत हो चुकी है, जिससे इसकी सुरक्षा और व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

एक अलग मामले में, आयोग ने 2 मई को हरियाणा के ग्रेटर फरीदाबाद स्थित पुरी प्राणायाम सोसाइटी में सीवर की सफाई करते समय दो सफाईकर्मियों की मौत की मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भवन के एस्टेट मैनेजर के निर्देश पर श्रमिकों ने बिना किसी सुरक्षा उपकरण या गैस मास्क के मैनहोल में प्रवेश किया था।

आयोग ने पाया है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में कही गई बातें सच हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक गंभीर मुद्दा है।

इसलिए, आयोग ने नगर निगम आयुक्त और पुलिस आयुक्त, फरीदाबाद, हरियाणा को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में जांच की स्थिति और मृतकों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का विवरण शामिल होना चाहिए।

नोटिस जारी करते हुए आयोग ने चिंता व्यक्त की है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों और एनएचआरसी की सलाह के बावजूद देश में इस तरह की घटनाएं लगातार होती रहती हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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