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जेजीयू के 15वें दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन, शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैश्विक नेतृत्व का मनाया गया उत्सव

जेजीयू के 15वें दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन, शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैश्विक नेतृत्व का मनाया गया उत्सव
जेजीयू के 15वें दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन, शैक्षणिक उत्कृष्टता और वैश्विक नेतृत्व का मनाया गया उत्सव

सोनीपत, 28 जुलाई (आईएएनएस)। ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) ने 25-26 जुलाई को आयोजित दो दिवसीय 15वें दीक्षांत समारोह का सफलतापूर्वक समापन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट कार्यक्रमों के 5,604 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

दीक्षांत समारोह में स्नातक बनने वाले छात्र-छात्राओं, उनके परिवारों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों तथा देश-विदेश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर शैक्षणिक उत्कृष्टता, नेतृत्व, नवाचार और लोकसेवा की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत जेजीयू के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार के स्वागत भाषण और विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट से हुई। उन्होंने शिक्षण, अनुसंधान, लोकसेवा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला।

इसके बाद जेजीयू के चांसलर नवीन जिंदल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्हें अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में ईमानदारी, करुणा, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया।

समारोह में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा, वर्ल्डवाइड यूनिवर्सिटीज नेटवर्क की कार्यकारी निदेशक एवं ऑकलैंड विश्वविद्यालय (न्यूजीलैंड) की पूर्व कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) डॉन फ्रेशवॉटर, हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डॉ. तरुण खन्ना तथा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे।

नवीन जिंदल ने कहा कि विद्यार्थी ऐसे समय में स्नातक बन रहे हैं, जब पूरी दुनिया भारत की ओर उम्मीद और विश्वास के साथ देख रही है।

उन्होंने कहा, "भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है और प्रौद्योगिकी, नवाचार, उद्यमिता, स्वास्थ्य सेवा तथा अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। लेकिन भारत की असली ताकत केवल उसकी अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि उसके 1.5 अरब लोग हैं। इसलिए आपकी जिम्मेदारी पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक है। डिग्री आपको आजीविका दिला सकती है, लेकिन जीवन का उद्देश्य ही उसे वास्तविक अर्थ देता है।"

उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना उनके पिता ओ.पी. जिंदल को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से की गई थी। ओ.पी. जिंदल का मानना था कि किसी भी व्यक्ति को दिया जाने वाला सबसे बड़ा उपहार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है और वे विशेष रूप से बालिका शिक्षा के प्रबल समर्थक थे।

मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह दिन वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सपनों की सफलता का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की उस सोच का प्रतीक है, जिसे ओ.पी. जिंदल ने आगे बढ़ाया। आज यह भारत के अग्रणी बहुविषयक विश्वविद्यालयों में शामिल है। आधुनिक चुनौतियां युवाओं से केवल दक्षता ही नहीं, बल्कि सही निर्णय लेने की क्षमता भी मांगती हैं। आप जिस भी पेशे में जाएं, आपका दायित्व कानून के शासन को मजबूत करना और एक न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करना होगा।"

विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर (डॉ.) डॉन फ्रेशवॉटर ने कहा कि स्नातक होना केवल सफलता का अंत नहीं, बल्कि जीवन के अगले अध्याय की शुरुआत है।

उन्होंने कहा, "उच्च शिक्षा केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी भी सौंपती है। आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अधिक सक्षम होगी, लेकिन हमें सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को भी समान महत्व देना होगा। आपका भविष्य एआई की नकल करने में नहीं, बल्कि उन मानवीय गुणों को विकसित करने में है जो मशीनों में कभी नहीं हो सकते।"

हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डॉ. तरुण खन्ना ने विद्यार्थियों से जिज्ञासु बने रहने और असफलताओं से सीखने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती। जीवन हमेशा आपकी बनाई योजना के अनुसार नहीं चलता। अपनी जिज्ञासा का अनुसरण करें, असफलताओं को स्वीकार करें और हर अनुभव से सीखते हुए आगे बढ़ते रहें। यही सफलता का मार्ग है।"

दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि प्रत्येक दीक्षांत समारोह एक नई शुरुआत का प्रतीक होता है।

उन्होंने कहा, "केवल ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ज्ञान हमें बताता है कि क्या संभव है, जबकि विवेक यह सिखाता है कि क्या उचित है। कौशल हमें आजीविका देता है, लेकिन मूल्य तय करते हैं कि वह आजीविका समाज के कितने काम आएगी। विश्वविद्यालय ज्ञान दे सकते हैं, लेकिन चरित्र का निर्माण वातावरण, अनुभव और अच्छे लोगों के साथ मिलकर होता है।"

उन्होंने नवीन जिंदल की दूरदृष्टि की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने पिता ओ.पी. जिंदल की स्मृति में विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित कर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

संस्थापक कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) सी. राज कुमार ने बताया कि इस वर्ष जेजीयू ने अपनी स्थापना के 17 वर्ष पूरे कर लिए हैं।

उन्होंने कहा कि 2009 में एक स्कूल के साथ शुरू हुई यह संस्था आज 12 स्कूलों वाले बहुविषयक विश्वविद्यालय के रूप में विकसित हो चुकी है। यहां 51 देशों के शिक्षक, 160 से अधिक देशों के छात्र अध्ययन कर रहे हैं तथा विश्वविद्यालय ने 80 से अधिक देशों के 600 से अधिक प्रमुख संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग स्थापित किया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में 16,000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं और संस्थान का उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध कराना तथा शैक्षणिक स्वतंत्रता और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है।

समारोह के अंत में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर दबीरू श्रीधर पटनायक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया, जबकि प्रोफेसर (डॉ.) उपासना महांता, डीन (प्रवेश एवं आउटरीच), ने मुख्य अतिथियों और विशिष्ट अतिथियों का परिचय कराया।

--आईएएनएस

एबीएस

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