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जावेद अख्तर ने विज्ञान और तकनीक को कला के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर दिया जोर

जावेद अख्तर ने विज्ञान और तकनीक को कला के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर दिया जोर
जावेद अख्तर ने विज्ञान और तकनीक को कला के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर दिया जोर

मुंबई, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। वरिष्ठ पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को उदार कलाओं (लिबरल आर्ट्स) के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया है।

जावेद अख्तर ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ उदार कलाओं (लिबरल आर्ट्स) के समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इतिहास, साहित्य, कविता और चित्रकला जैसे विषयों का ज्ञान एक संतुलित व्यक्तित्व के लिए बेहद जरूरी है।

अख्तर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन कला और मानवीय विषयों की समझ ही इंसान को कंप्यूटर और रोबोट से अलग बनाती है।

उन्होंने कहा, “विज्ञान और प्रौद्योगिकी बहुत महत्वपूर्ण हैं। लेकिन लिबरल आर्ट्स की भी कुछ समझ होना जरूरी है। यही एक इंसान और कंप्यूटर या रोबोट के बीच का अंतर है।”

गीतकार ने आगे कहा कि लोगों को अपने-अपने क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लिबरल आर्ट्स का अध्ययन करने वालों को भी विज्ञान की बुनियादी समझ होनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “इसी तरह विज्ञान के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लिबरल आर्ट्स की जानकारी होनी चाहिए। इतिहास, साहित्य, कविता, चित्रकला और लोक कलाएं, इन सबकी समझ जरूरी है। ज्ञान को इस तरह अलग-अलग खांचों में बांटना सही नहीं है।”

पटकथा लेखक, गीतकार और कवि के रूप में पहचान रखने वाले जावेद अख्तर लंबे समय से भारतीय सिनेमा और साहित्य से जुड़े रहे हैं।

जावेद अख्तर को प्रसिद्ध पटकथा लेखन जोड़ी सलीम-जावेद के सदस्य के रूप में व्यापक पहचान मिली। सलीम खान के साथ उनकी इस जोड़ी ने ‘जंजीर’ (1973), ‘दीवार’ (1975), ‘शोले’ (1975) और ‘मिस्टर इंडिया’ (1987) जैसी कई ऐतिहासिक हिंदी फिल्मों की पटकथाएं लिखीं, जिन्होंने बॉलीवुड की कहानी कहने की शैली पर गहरा प्रभाव छोड़ा।

बाद में उन्होंने एक प्रतिष्ठित गीतकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई और ‘सिलसिला’, ‘1942: ए लव स्टोरी’, ‘बॉर्डर’, ‘रिफ्यूजी’ और ‘लगान’ जैसी फिल्मों के लिए यादगार गीत लिखे।

सिनेमा के अलावा अख्तर एक प्रतिष्ठित उर्दू कवि भी हैं। उनकी चर्चित काव्य कृतियों में ‘तरकश’ शामिल है। भारतीय सिनेमा और साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा 1999 में पद्म श्री और 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है।

--आईएएनएस

पीएम

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