Samachar Nama
×

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: सौरव दास, रंका और शिंदे ने पुलिस के सामने पेश होने के लिए मांगा और समय

जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: सौरव दास, रंका और शिंदे ने पुलिस के सामने पेश होने के लिए मांगा और समय
जंतर-मंतर प्रदर्शन मामला: सौरव दास, रंका और शिंदे ने पुलिस के सामने पेश होने के लिए मांगा और समय

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे ने पूछताछ के लिए दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के सामने पेश होने के लिए और समय मांगा है।

तीनों को गुरुवार दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने पुलिस से पेश होने के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। अब पुलिस उन्हें नए समन जारी करेगी।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सौरव दास और आशुतोष रंका को एक सप्ताह न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था। इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़े मामलों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था।

ये मामले 13 अक्टूबर की घटना से संबंधित हैं, जब दास, रंका और शिंदे सहित 11 अन्य लोग जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश कर गए थे। जंतर-मंतर को कानून के तहत निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किया गया है।

दिल्ली पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था। शिंदे को जमानत बांड पर रिहा कर दिया गया था, जबकि दास और रंका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे। सीजेपी के सदस्य मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी भी की थी।

दास और रंका को बुधवार को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के समक्ष लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा किया गया। दोनों ने आश्वासन दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे और कानून के अनुसार जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित किए जाने तक वहां प्रदर्शन करने का आह्वान नहीं करेंगे।

एसईएम ऋतुराज ने जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश के मामले में जांच पूरी होने तक दोनों कार्यकर्ताओं को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती बांड जमा करने के बाद रिहा करने का निर्देश दिया। वहीं, अपने लिखित आश्वासन में दोनों कार्यकर्ताओं ने शांति भंग नहीं करने का वादा किया। उन्होंने न्यायपालिका और एसईएम अदालत सहित उसकी सभी संस्थाओं में पूरा विश्वास जताया।

एसईएम अदालत ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 135(3) के तहत शांति भंग होने या सार्वजनिक शांति व्यवस्था प्रभावित होने से रोकने के लिए आवश्यक तत्काल उपाय, लिखित आश्वासन के समर्थन वाले बांड के जरिए पर्याप्त रूप से सुनिश्चित किए जा सकते हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story

Tags