जयपुर रेंज पुलिस का 'ऑपरेशन सेफर रोड' अभियान, गूगल मैप्स से जुड़ा दुर्घटना की आशंका वाले 101 इलाके
जयपुर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। सड़क सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए जयपुर रेंज पुलिस ने 'ऑपरेशन सेफर रोड' अभियान शुरू किया है। यह टेक्नोलॉजी पर आधारित पहल है, जिसके तहत जयपुर रेंज में नेशनल और स्टेट हाईवे पर दुर्घटना की आशंका वाले इलाकों को गूगल मैप्स से जोड़ा गया है।
इस पहल का मकसद गाड़ी चलाने वालों को उन जगहों के बारे में पहले से चेतावनी देना है जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं ताकि वे संभावित खतरनाक रास्तों पर पहुंचने से पहले अपनी गति कम कर सकें और ज्यादा सावधानी बरत सकें।
जयपुर रेंज के आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें हुई मौतों के डेटा का वैज्ञानिक विश्लेषण करके इन 'ब्लैक स्पॉट' (दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों) की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि इसका मकसद न केवल दुर्घटना-प्रवण जगहों की पहचान करना है, बल्कि तकनीक का इस्तेमाल करके गाड़ी चलाने वालों को समय पर चेतावनी देना और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देना भी है।
2023 से 2025 तक के दुर्घटना डेटा के आधार पर पुलिस ने जयपुर रेंज में 101 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है। इन जगहों में जयपुर ग्रामीण: 28, दौसा: 24, कोटपूतली-बहरोड़: 19, अलवर: 11, सीकर: 10, भिवाड़ी: 5, खैरथल-तिजारा: और झुंझुनू: 1 शामिल हैं।
इन जगहों का वर्गीकरण न केवल दुर्घटनाओं की संख्या के आधार पर किया गया है, बल्कि मुख्य रूप से तीन वर्ष की अवधि के दौरान वहां हुई मौतों की गंभीरता के आधार पर किया गया है। इस पहल के तहत जयपुर रेंज में हाईवे पर नेविगेशन के लिए गूगल मैप्स का इस्तेमाल करने वाले ड्राइवरों को किसी तय दुर्घटना-प्रवण क्षेत्र के पास पहुंचने पर सड़क-सुरक्षा अलर्ट मिलेगा।
इस पहले से मिलने वाली चेतावनी का मकसद ड्राइवरों को गति कम करने, सतर्क रहने और सड़क की स्थितियों के अनुसार अपनी ड्राइविंग को समायोजित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। जयपुर रेंज पुलिस ने 'ऑपरेशन सेफर रोड' के हिस्से के तौर पर क्यूआर कोड-आधारित डिजिटल सुविधा भी विकसित की है। क्यूआर कोड को स्कैन करके यूजर गूगल मैप्स के जरिए पहचाने गए ब्लैक स्पॉट के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस जानकारी में जगह, जोखिम श्रेणी, भौगोलिक निर्देशांक और सड़क-सुरक्षा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने सबसे पहले पुलिस रिकॉर्ड, ट्रैफिक जानकारी और हाईवे से इकट्ठा किए गए दुर्घटना डेटा का विस्तृत विश्लेषण किया। इसके बाद, पहचानी गई हर दुर्घटना-प्रवण जगह का भौगोलिक रूप से सत्यापन किया गया और उसे डिजिटल रूप से मैप किया गया। फिर गूगल मैप्स के साथ जोड़ने के लिए इन जगहों से जुड़ी तकनीकी जानकारी तैयार की गई।
आईजी राहुल प्रकाश ने कहा कि यह पहल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
जयपुर रेंज में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने के बाद, पुलिस ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें इस सिस्टम को पूरे राजस्थान और बाद में देश के अन्य हिस्सों के हाईवे तक बढ़ाने की मांग की गई है।
जयपुर रेंज पुलिस को उम्मीद है कि दुर्घटना की आशंका वाली जगहों पर समय रहते डिजिटल चेतावनी मिलने से वाहन चालक ज्यादा सावधानी बरतेंगे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों को कम करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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