'स्मार्ट किचन' योजना पर जगन का हमला, बोले- 85 हजार महिलाओं की आजीविका छीन रही सरकार
ताडेपल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने राज्य सरकार की प्रस्तावित 'स्मार्ट किचन' योजना पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना के जरिए सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन (मिड-डे मील) तैयार करने वाली करीब 85,000 महिलाओं की आजीविका छीनने की कोशिश की जा रही है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी पोस्ट में जगन ने कहा कि सरकार इस योजना की आड़ में अपने समर्थकों को लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रही है, जबकि वर्षों से स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली हजारों महिलाओं को बेरोजगार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इनमें से कई महिलाएं पिछले दो दशकों से अधिक समय से सरकारी स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने का काम कर रही हैं, लेकिन अब उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है।
जगन ने आरोप लगाया कि मिड-डे मील कर्मियों को पिछले दो महीनों से वेतन भी नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां और बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में इन कर्मचारियों का मानदेय 1,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले मौजूदा सरकार ने इन कर्मचारियों को और अधिक सहायता देने का वादा किया था, लेकिन अब आधुनिकीकरण के नाम पर उनकी आजीविका समाप्त करने की कोशिश की जा रही है।
जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी मिड-डे मील कर्मियों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
उन्होंने सरकार से लंबित वेतन का तत्काल भुगतान करने और चुनावी वादे के अनुसार मानदेय बढ़ाने की मांग करते हुए कहा कि हजारों महिलाओं की रोजी-रोटी छीनने के बजाय उन्हें आर्थिक सुरक्षा दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह केवल वेतन का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और जीवनयापन का सवाल है।" उनके अनुसार, सरकार का यह कदम उन हजारों परिवारों को प्रभावित करेगा, जिनकी आजीविका इन महिलाओं की आय पर निर्भर है।
जगन ने कहा कि पीढ़ियों से स्कूली बच्चों की सेवा कर रही इन महिलाओं को सम्मान और सुरक्षा मिलनी चाहिए, न कि उपेक्षा।
उन्होंने आरोप लगाया कि 'स्मार्ट किचन' योजना को लेकर अब शासन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि तकनीकी आधुनिकीकरण मानव कल्याण की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
--आईएएनएस
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