आंध्र प्रदेश: वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार पर बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया
अमरावती, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने बुधवार को कहा कि मछली पकड़ने के सभी बंदरगाह मछुआरों के हैं। उन्होंने गठबंधन सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर 'ब्लू इकॉनमी' (नीली अर्थव्यवस्था) को बर्बाद करने और बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंपने का आरोप लगाया।
नेल्लोर जिले में जुव्वेलादिन्ने मछली पकड़ने के बंदरगाह का दौरा करने के बाद मछुआरों को संबोधित करते हुए जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से सवाल किया कि जुव्वेलादिन्ने बंदरगाह को अभी तक मछुआरों को क्यों नहीं सौंपा गया है।
इसके बजाय, चंद्रबाबू ने एक निजी रक्षा कंपनी को जमीन आवंटित कर दी है, जिससे मछुआरों के मुंह से रोटी छिन गई है। उन्होंने कहा कि पास के कृष्णपटनम बंदरगाह पर काफी जमीन उपलब्ध है, लेकिन फिर भी उन्होंने व्यावसायिक कारणों से यहां की जमीन देने का फैसला किया।
उन्होंने मछुआरों से कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आने वाले दिनों में हालात बदल जाएंगे और हम सभी बंदरगाह मछुआरों को समर्पित कर देंगे और ब्लू इकॉनमी को बेहतर बनाएंगे।"
उन्होंने दावा किया कि यह वाईएसआरसीपी सरकार ही थी, जिसने तट के किनारे सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए 26,000 करोड़ रुपए की लागत से चार बंदरगाह और दस मछली पकड़ने वाले बंदरगाहों के अलावा छह मछली लैंडिंग केंद्र बनाने की योजना बनाई थी, और मैरीटाइम बोर्ड से सभी अनुमतियां प्राप्त की थीं।
उन्होंने कहा, "हमने मार्च 2024 में जुव्वलादिन्ने का काम पूरा कर लिया था और इसे एक तरह से देश को समर्पित भी कर दिया था, लेकिन चुनाव आचार संहिता के चलते हम इसका औपचारिक उद्घाटन नहीं कर पाए। बाद में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया। अब सवाल यह है कि चंद्रबाबू ने मछुआरों को यह बंदरगाह क्यों नहीं सौंपा? इसका जवाब इस बात से साफ हो जाता है कि बंदरगाह की जमीन एक निजी पार्टी को आवंटित कर दी गई थी, जो धीरे-धीरे इसके निजीकरण का रास्ता खोल रही है।"
उन्होंने कसम खाई कि वे सरकार को यह जमीन किसी भी निजी पार्टी को सौंपने नहीं देंगे।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के बाद हम सुधारात्मक कदम उठाएंगे और सभी बंदरगाहों को मछुआरों को समर्पित कर देंगे। अपनी योजना के अनुसार, हम 90 प्रतिशत सब्सिडी पर 1,250 मशीनीकृत नावें उपलब्ध कराएंगे। इससे 25,000 से ज्यादा परिवारों को मदद मिलेगी, क्योंकि हर नाव का इस्तेमाल मछुआरों का एक समूह मिलकर करेगा, जिससे 'ब्लू इकॉनमी' (नीली अर्थव्यवस्था) को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने चंद्रबाबू नायडू पर आरोप लगाया कि वे अपने व्यावसायिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मछुआरों की आजीविका को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
--आईएएनएस
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