आईआरडीएआई के प्रस्तावित नए नियमों से देश में बदल जाएगा पूरा इंश्योरेंस इकोसिस्टम, ग्राहकों को होगा फायदा
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की ओर से प्रस्तावित नए नियमों से देश के इंश्योरेंस इकोसिस्टम में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है और इससे इंश्योरेंस इंडस्ट्री में प्रोडक्ट के मुताबिक कमीशन कैप की नई व्यवस्था लागू हो सकती है। यह बयान एक्सपर्ट्स की ओर से दिया गया।
इंश्योरेंस रेगुलेटर ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में बड़े सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इसमें एक आसान तीन-स्तरीय ढांचा शामिल है, जिसका उद्देश्य पॉलिसीहोल्डर्स के लिए लागत कम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के खिलाफ सुरक्षा को मजबूत करना है।
जानकारों के मुताबिक, इस कदम से निश्चित रूप से ग्राहकों को फायदा होगा, लेकिन इससे बैंक-एश्योरेंस पार्टनर और एनबीएफसी जैसे डिस्ट्रीब्यूटर्स के मार्जिन पर तुरंत दबाव भी पड़ेगा।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, "आखिरकार, इस प्रस्ताव का मकसद डिजिटल तरीकों को अपनाना, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखना और एक ऐसा मार्केट बनाना है जो टिकाऊ हो और ग्राहकों को प्राथमिकता दे। जैसा कि कहा जाता है, 'जरूरत ही आविष्कार की जननी है', और ये बदलाव कंपनियों को नए तरीके सोचने और अपनाने के लिए मजबूर करेंगे।"
'बीमा वितरण के अर्थशास्त्र को फिर से तय करने' पर आईआरडीएआई के कंसल्टेशन पेपर में नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस के लिए कमीशन या भुगतान की सीमा तय करने का प्रस्ताव है। इसके तहत थर्ड-पार्टी प्रीमियम के लिए यह भुगतान शून्य और खुद के नुकसान व उससे जुड़े कवर के लिए 5 प्रतिशत रखने का सुझाव दिया गया है।
इससे "टेक्नोलॉजी, जागरूकता और उससे जुड़े खर्च" भी कमीशन की सीमा के दायरे में आ जाएंगे, और मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (एमआईएसपी) सिस्टम की जगह एक व्यापक इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (आईडीई) सिस्टम ले लेगा।
शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल ने कहा, "इन बदलावों का ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य लोगों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई कम होने और डीलर से जुड़े समझौतों के कड़े होने से, डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन और कम हो सकता है।"
इन प्रस्तावों का मकसद इंश्योरेंस की बिक्री को डीलर के साथ अन्य रिश्तों से अलग करना है। डीलरों को सिर्फ इसलिए कैशलेस रिपेयर से इनकार करने की इजाजत नहीं होगी क्योंकि ग्राहक ने इंश्योरेंस कहीं और से खरीदा है।
साथ ही, आईआरडीएआई ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे वैकल्पिक डिजिटल चैनलों तक ज्यादा पहुंच देने का प्रस्ताव दे रहा है, और डीलरों के लिए जरूरी होगा कि वे गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को इस विकल्प के बारे में साफ तौर पर बताएं।
लाल ने कहा, "इन सुधारों से डीलर-आधारित पारंपरिक मॉडल बदल सकता है, जिसमें इंश्योरेंस की बिक्री, गाड़ी की फाइनेंसिंग और बिक्री के बाद की सर्विसिंग आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। आय का दबाव डिस्ट्रीब्यूटर्स को रिन्यूअल, सर्विसिंग, टेक्नोलॉजी और अन्य मंजूर किए हुए वैल्यू-एडेड सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकता है।"
हालांकि, जानकारों का कहना है कि इसका अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आईआरडीएआई आखिरकार कौन से नियम अपनाता है और उनके साथ कैसा ट्रांजिशन फ्रेमवर्क लागू करता है।
कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव है।इसमें हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार के कमीशन को 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच तय करने और रिन्यूअल व पोर्टिंग पेआउट को सिर्फ 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक सीमित करने की बात कही गई है।
ड्राफ्ट पेपर में डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं के लिए पहले साल के कमीशन को अवधि के आधार पर 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत के बीच सीमित किया गया है। यह पहले मिलने वाले उन ज्यादा प्रभावी पेआउट से कम है, जो प्रमोशनल खर्च और रिवॉर्ड्स को मिलाकर 60 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे।
--आईएएनएस
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