Samachar Nama
×

अमेरिका-ईरान युद्धविराम का इंडोनेशिया ने किया स्वागत, शांति की दिशा में सकारात्मक कदम बताया

जकार्ता, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडोनेशिया ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम का इंडोनेशिया ने किया स्वागत, शांति की दिशा में सकारात्मक कदम बताया

जकार्ता, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडोनेशिया ने बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया।

इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता इवोन मेवेंगकांग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह एक सकारात्मक शुरुआत है और सभी पक्षों को इस मौके का उपयोग करते हुए स्थायी शांति समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संवाद और कूटनीति ही इस संघर्ष का एकमात्र समाधान है। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता के सम्मान की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इंडोनेशिया नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रचनात्मक कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन जारी रखेगा।

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमलों को दो सप्ताह के लिए स्थगित करने पर सहमति जताई है। यह फैसला तेहरान द्वारा हॉर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और व्यापक शांति समझौते की दिशा में चल रही बातचीत से जुड़ा है।

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा था। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है।

इजरायल ने भी अमेरिका के इस फैसले का समर्थन किया, हालांकि यह स्पष्ट किया कि प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा।

वहीं, इंडिया ने भी युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि यह संघर्ष लोगों के लिए पीड़ा का कारण बना है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को भी प्रभावित किया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “हम युद्धविराम का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इससे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित होगी। जैसा कि हम पहले भी कहते रहे हैं, तनाव में कमी, संवाद और कूटनीति ही इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए आवश्यक हैं।”

--आईएएनएस

डीएससी

Share this story

Tags