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भारत में तेजी से बढ़ रही बेहद अमीर लोगों की आबादी, 2031 तक 25 हजार के पार होगी: रिपोर्ट

मुंबई, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में अल्ट्रा-हाई-नेटवर्थ-इंडिविजुअल (यूएचएनडब्ल्यूआई) की आबादी तेजी से बढ़ी है और 2031 तक यह 25,000 के अधिक होने का अनुमान है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
भारत में तेजी से बढ़ रही बेहद अमीर लोगों की आबादी, 2031 तक 25 हजार के पार होगी: रिपोर्ट

मुंबई, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत में अल्ट्रा-हाई-नेटवर्थ-इंडिविजुअल (यूएचएनडब्ल्यूआई) की आबादी तेजी से बढ़ी है और 2031 तक यह 25,000 के अधिक होने का अनुमान है। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।

नाइट फ्रैंक के एनालिसिस में कहा गया कि भारत की यूएचएनडब्ल्यूआई आबादी वर्तमान में 19,877 है, जो कि 2031 तक 27 प्रतिशत बढ़कर 25,217 होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत में अरबपतियों की संख्या में भी पिछले पांच वर्षों में 58 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि देखी गई है, जो 2026 में बढ़कर 207 हो जाएगी, जो अमेरिका और चीन के बाद वैश्विक स्तर पर तीसरी सबसे बड़ी संख्या है।

देश में अरबपतियों की संख्या में 2031 तक 51 प्रतिशत की और वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे यह संख्या 313 तक पहुंच जाएगी। इसके साथ ही वैश्विक अरबपति आबादी में भारत की हिस्सेदारी 6.7 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 8 प्रतिशत हो जाएगी।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2026 में वैश्विक यूएचएनडब्ल्यूआई की आबादी में भारत की हिस्सेदारी 2.8 प्रतिशत होगी, जो पांच साल पहले मात्र 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक थी। यह वैश्विक धन परिदृश्य में देश के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।

अल्ट्रा-रिच लोगों के मामले में देश अब विश्व स्तर पर छठे स्थान पर है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में धन का वितरण भौगोलिक रूप से अधिक होता जा रहा है, हालांकि मुंबई अल्ट्रा-रिच लोगों की आबादी में 35.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ अपना दबदबा बनाए हुए है।

दिल्ली की हिस्सेदारी बढ़कर 22.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि चेन्नई और हैदराबाद ने भी पिछले दशक में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। वहीं, बेंगलुरु की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट आई है।

नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि भारत के वेल्थ आधार में विस्तार देश के अधिक उद्यमशील और वित्तीय रूप से परिष्कृत अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को दर्शाता है।

उन्होंने आगे कहा कि डिजिटलीकरण, सूचीबद्ध शेयर बाजार, निजी पूंजी और पारिवारिक स्वामित्व वाले व्यवसाय इस निरंतर धन सृजन के प्रमुख चालक हैं।

--आईएएनएस

एबीएस/

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