Samachar Nama
×

2030 तक भारत में गिग इंटरनेट वर्कफोर्स तीन गुना होकर 2 करोड़ के करीब पहुंच सकती है: रिपोर्ट

2030 तक भारत में गिग इंटरनेट वर्कफोर्स तीन गुना होकर 2 करोड़ के करीब पहुंच सकती है: रिपोर्ट
2030 तक भारत में गिग इंटरनेट वर्कफोर्स तीन गुना होकर 2 करोड़ के करीब पहुंच सकती है: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की गिग इंटरनेट वर्कफोर्स वर्ष 2030 तक लगभग तीन गुना बढ़कर 1.7 करोड़ से 2.1 करोड़ मासिक सक्रिय श्रमिकों तक पहुंच सकती है। वर्तमान में देश में करीब 60 लाख लोग गिग इंटरनेट प्लेटफॉर्म के जरिए काम कर रहे हैं, और यह संख्या 24 से 29 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ने का अनुमान है।

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डिलीवरी, राइड-हेलिंग (कैब सेवाएं) और होम सर्विसेज जैसे क्षेत्रों से जुड़ा गिग वर्कफोर्स वर्ष 2030 तक देश में हर साल पैदा होने वाली लगभग 80 लाख गैर-कृषि नौकरियों में से करीब 70 प्रतिशत रोजगार की जरूरत को पूरा कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2030 तक राइड-हेलिंग क्षेत्र में सबसे अधिक 1.2 करोड़ से 1.4 करोड़ गिग वर्कर होंगे। इसके बाद डिलीवरी सेक्टर में 50 से 70 लाख और होम सर्विसेज में 20,000 से 30,000 लोगों के कार्यरत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनुमानित गिग वर्कफोर्स में 30 प्रतिशत से अधिक लोग पहली बार रोजगार के बाजार में प्रवेश करने वाले हो सकते हैं। सर्वेक्षण में शामिल मौजूदा गिग वर्कर्स में से करीब 54 प्रतिशत ने बताया कि गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले वे किसी भी प्रकार की वेतनभोगी नौकरी में नहीं थे।

2,250 गिग वर्कर्स पर किए गए सर्वेक्षण के आधार पर तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि फुल-टाइम गिग वर्कर्स की आय समान प्रकार की औपचारिक और अनौपचारिक नौकरियों की तुलना में ढाई गुना तक अधिक है। गिग वर्कर्स की औसत कमाई 138 रुपए प्रति घंटा रही, जबकि समान कार्य करने वाले औपचारिक और अनौपचारिक कर्मचारियों की औसत आय 54 रुपए प्रति घंटा दर्ज की गई।

मासिक शुद्ध आय के मामले में होम सर्विसेज से जुड़े गिग वर्कर्स सबसे आगे रहे, जिनकी औसत कमाई 70,000 से 80,000 रुपए प्रति माह रही। वहीं, राइड-हेलिंग ड्राइवरों की मासिक आय 37,000 से 39,000 रुपए और डिलीवरी वर्कर्स की औसत आय 22,000 से 23,000 रुपए प्रति माह रही।

रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि पिछले एक दशक में गिग इंटरनेट भारत के कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है। इन प्लेटफॉर्म्स ने लाखों लोगों को लचीले और मांग आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं, जिससे औपचारिक और अनौपचारिक दोनों तरह के कार्यबल के लिए आजीविका का नया रास्ता खुला है।

रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल लगभग 70 प्रतिशत गिग वर्कर्स का मानना है कि इस क्षेत्र में काम करने से उनके भविष्य के रोजगार के अवसर बेहतर हुए हैं। साथ ही, इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए उन्हें ग्राहक प्रबंधन, नेविगेशन और वित्तीय योजना जैसी उपयोगी कौशल भी सीखने का अवसर मिला है।

--आईएएनएस

डीबीपी

Share this story

Tags