वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अगस्त में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में करीब 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि
नई दिल्ली, 25 सितंबर (आईएएनएस)। भारत के इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात ने चालू वित्त वर्ष में लगातार पांचवें महीने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईईपीसी) इंडिया ने शुक्रवार को बताया कि अगस्त में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर 24.86 प्रतिशत बढ़कर 12.32 अरब डॉलर पहुंच गया।
उद्योग संगठन ईईपीसी इंडिया ने कहा कि भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात शीर्ष 25 प्रमुख बाजारों में से अधिकांश में बढ़ा है। केवल संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब में निर्यात प्रभावित रहा, जिसका प्रमुख कारण पश्चिम एशिया संकट से पैदा हुई लॉजिस्टिक्स चुनौतियां थीं। इसके बावजूद अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे प्रमुख बाजारों में मांग मजबूत बनी रही।
अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात अगस्त में 31 प्रतिशत बढ़कर 2.20 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं चीन को होने वाला निर्यात पिछले वर्ष अगस्त के 242.50 मिलियन डॉलर से बढ़कर 424.65 मिलियन डॉलर हो गया, जो लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
ब्रिटेन को इंजीनियरिंग निर्यात में 28.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया को निर्यात दोगुने से अधिक बढ़कर 466 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। वहीं इंडोनेशिया को निर्यात में 182 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज करते हुए यह 292.30 मिलियन डॉलर रहा।
ओमान को होने वाला इंजीनियरिंग निर्यात लगभग चार गुना बढ़कर 198 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। उद्योग संगठन के अनुसार, जून 2026 में लागू हुए भारत-ओमान मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अगस्त के दौरान इंजीनियरिंग क्षेत्र के 34 में से 31 उत्पाद समूहों ने सालाना आधार पर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की, जो निर्यात वृद्धि के व्यापक आधार को दर्शाता है।
ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चड्ढा ने कहा, "प्रमुख व्यापार मार्गों में व्यवधान और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद हाल के महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात का प्रदर्शन यह दिखाता है कि वैश्विक बाजारों में 'ब्रांड इंडिया' पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है।"
उन्होंने कहा कि यह सुधार इस बात का संकेत है कि वैश्विक मांग की परिस्थितियां भारतीय इंजीनियरिंग निर्यातकों के लिए अधिक अनुकूल हो रही हैं। ऐसे में भारत को अपने प्रमुख बाजारों में उपस्थिति और मजबूत करनी चाहिए, नए निर्यात गंतव्यों की तलाश करनी चाहिए और सप्लाई चेन को अधिक लचीला बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
अप्रैल से अगस्त 2026-27 की अवधि में भारत का कुल इंजीनियरिंग निर्यात 58.70 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 49.10 अरब डॉलर था। इस प्रकार पांच महीनों में इंजीनियरिंग निर्यात में 19.55 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
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