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भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 27 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 27 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 27 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 27 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में खुदरा मुद्रास्फीति 4.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2026 के 2.1 प्रतिशत से अधिक है।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि विकास दर में कमी आने के बावजूद, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दरों को लंबे समय तक स्थिर रख सकती है।

साथ ही बताया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए तरलता की स्थिति को नियंत्रित करना जारी रख सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स ने अनुकूल रुझान दिखाए थे।

हालांकि, पश्चिम एशिया की स्थिति निकट भविष्य के व्यापक आर्थिक परिदृश्य में अनिश्चितता पैदा करती है, खासकर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों के आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुए।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊर्जा की कीमतों में लगातार वृद्धि से इनपुट लागत बढ़ सकती है और इसका कंपनियों की मुनाफे और विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।

रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल मानते हुए, चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2026 के लगभग 1.0 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग 1.7 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

अनुमान है कि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि से चालू खाता मुद्रा में 30-40 आधार अंकों की वृद्धि हो सकती है।

जीएसटी दरों में युक्तिकरण और त्योहारी मांग जैसे कारकों से उपभोग के रुझान स्थिर बने हुए हैं।

वहीं, रिपोर्ट में बताया गया कि खर्च में वृद्धि का एक कारण कम मूल्य के लेन-देन भी हैं, जिनमें क्रेडिट कार्ड के उपयोग की मात्रा लेन-देन के मूल्य से अधिक तेजी से बढ़ी है। खर्च में आई इस तेजी से संकेत मिलता है कि कुल उपभोग स्थिर बना हुआ है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि निकट भविष्य में निजी क्षेत्र की निवेश गतिविधियां वैश्विक घटनाक्रमों और लागत स्थितियों से प्रभावित रह सकती हैं।

--आईएएनएस

एबीएस/

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