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आईपीयू की 153वीं महासभा में हिस्सा लेने तंजानिया रवाना हुआ भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल

आईपीयू की 153वीं महासभा में हिस्सा लेने तंजानिया रवाना हुआ भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल
आईपीयू की 153वीं महासभा में हिस्सा लेने तंजानिया रवाना हुआ भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल

नई दिल्ली, 3 अक्टूबर (आईएएनएस)। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के नेतृत्व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को तंजानिया के अरूशा के लिए रवाना हुआ। प्रतिनिधिमंडल 5 से 9 अक्टूबर तक होने वाली अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा और उससे जुड़ी बैठकों में हिस्सा लेगा।

राज्यसभा सचिवालय के मुताबिक, आईपीयू की महासभा में दुनियाभर के सांसद आएंगे। इस बार महासभा का विषय "समावेशिता, विश्वास और सभी के लिए अवसरों के जरिए सुशासन को बढ़ावा देना और समुदायों को सशक्त बनाना" है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में लोकसभा सदस्य अनुराग ठाकुर, अपराजिता सारंगी, राज्यसभा सदस्य सस्मित पात्रा, लोकसभा सदस्य संजय जायसवाल, कमलजीत सहरावत, लता वानखेड़े, बिजुली कलिता मेधी और एन.के. प्रेमचंद्रन शामिल हैं।

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल मौजूदा वैश्विक मुद्दों से जुड़ी कई बैठकों, पैनल चर्चाओं और कार्यशालाओं में भाग लेगा। इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर भारत का पक्ष भी रखा जाएगा।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश गवर्निंग काउंसिल, सामान्य चर्चा, आपातकालीन विषय पर होने वाली चर्चा और आईपीयू अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के साथ होने वाली बैठक में हिस्सा लेंगे।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य लोकतंत्र और मानवाधिकार, शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, सतत विकास, महिलाओं की भागीदारी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, आतंकवाद से मुकाबला, स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर होने वाली चर्चाओं में शामिल होंगे।

इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और काम का भविष्य, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन तथा पर्वतीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण समेत कई अन्य विषयों पर भी चर्चा की जाएगी।

राज्यसभा सचिवालय ने कहा, "भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी आईपीयू के साथ भारत के निरंतर जुड़ाव और संसदीय कूटनीति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दिखाती है। इसके साथ ही यह वैश्विक शांति, विकास, लोकतंत्र और समुदायों के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर बहुपक्षीय संवाद और संसदों के बीच सहयोग के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।"

--आईएएनएस

एएमटी/वीसी

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