Samachar Nama
×

भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर रैंक में पदोन्नति के लिए मंजूरी दी

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी है, जो उनके करियर की प्रगति और 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में पहले की कानूनी कार्यवाही से जुड़े लंबे समय से चल रहे सेवा विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर रैंक में पदोन्नति के लिए मंजूरी दी

नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय सेना ने कर्नल श्रीकांत पुरोहित को ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नति के लिए मंजूरी दे दी है, जो उनके करियर की प्रगति और 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में पहले की कानूनी कार्यवाही से जुड़े लंबे समय से चल रहे सेवा विवाद में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह निर्णय सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) के पूर्व निर्देशों के बाद लिया गया है, जिसने पदोन्नति पर विचार करने की उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद 31 मार्च को निर्धारित उनकी सेवानिवृत्ति पर रोक लगा दी थी।

न्यायाधिकरण के हस्तक्षेप ने यह सुनिश्चित किया कि पदोन्नति और सेवा लाभों से संबंधित उनकी वैधानिक शिकायत पर निर्णय होने तक उनकी सेवा अवधि सक्रिय बनी रहे।

अपने पूर्व आदेश में एएफटी ने कर्नल पुरोहित की याचिका पर ध्यान दिया था, जिसमें उन्होंने कर्नल और ब्रिगेडियर के पदों पर पदोन्नति की मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि मालेगांव विस्फोट मामले में उनकी गिरफ्तारी और उसके बाद चली लंबी कानूनी कार्यवाही के कारण उनके करियर की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि के अनुसार, कर्नल पुरोहित को 2008 में गिरफ्तार किया गया था और वे 2017 तक हिरासत में रहे, जब उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना में अपनी सेवा पुनः शुरू की और अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहे। जुलाई 2025 में मुंबई की एक विशेष एनआईए अदालत ने उन्हें मालेगांव विस्फोट मामले में बरी कर दिया।

इससे पहले ट्रिब्यूनल ने भारत सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर यह पूछा था कि अधिकारी द्वारा मांगी गई राहत क्यों नहीं दी जानी चाहिए। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने तर्क दिया था कि लंबे और बेदाग सेवा रिकॉर्ड के बावजूद, मामले से संबंधित परिस्थितियों के कारण उनकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया गया।

अपने निष्कर्षों में एएफटी ने यह भी कहा कि उनकी वैधानिक शिकायत पर अंतिम निर्णय आने तक उनकी सेवानिवृत्ति को स्थगित रखा जाना चाहिए। अंतरिम राहत पर विचार करते समय न्यायाधिकरण ने उनके बरी होने और पुनः कार्यभार ग्रहण करने के बाद के सेवा रिकॉर्ड दोनों को ध्यान में रखा था।

आधिकारिक सूत्रों ने अब पुष्टि की है कि इन कार्यवाही के बाद सेना ने प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के अधीन उन्हें ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत करने को मंजूरी दे दी है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

Share this story

Tags