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भारत का यील्ड कर्व आरबीआई के लिक्विडिटी निकासी बढ़ाने से और सपाट होने की उम्मीद: रिपोर्ट

भारत का यील्ड कर्व आरबीआई के लिक्विडिटी निकासी बढ़ाने से और सपाट होने की उम्मीद: रिपोर्ट
भारत का यील्ड कर्व आरबीआई के लिक्विडिटी निकासी बढ़ाने से और सपाट होने की उम्मीद: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड कर्व के आगे और सपाट होने की उम्मीद है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लिक्विडिटी की निकासी तेज कर रहा है। इससे कुछ निवेशक पांच साल की तुलना में 10 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को प्राथमिकता दे सकते हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में विश्लेषकों के हवाले से कहा गया है कि पांच साल और 10 साल की अवधि वाले बॉन्ड की यील्ड के बीच का अंतर कम होने की उम्मीद है। आरबीआई द्वारा बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी निकालने के कारण कम अवधि वाले बॉन्ड की यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के हवाले से कहा गया है कि करीब 6.94 प्रतिशत पर कारोबार कर रही पांच साल की बेंचमार्क यील्ड बढ़कर 7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, अगर केंद्रीय बैंक आक्रामक मौद्रिक सख्ती का रुख बनाए रखता है।

विश्लेषकों ने कहा कि छोटी अवधि वाले बॉन्ड में यील्ड कर्व के और सपाट होने की संभावना है, क्योंकि आरबीआई प्रभावी मौद्रिक नीति संचरण सुनिश्चित करने के लिए ओवरनाइट दरों को रेपो रेट के आसपास या उससे ऊपर बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उनका अनुमान है कि पांच साल और 10 साल की यील्ड के बीच का अंतर घटकर महज 10 आधार अंक तक आ सकता है। अगर ओवरनाइट दरें रेपो रेट से काफी ऊपर चली जाती हैं, तो यील्ड कर्व सपाट या हल्का इनवर्टेड हो सकता है।

बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त लिक्विडिटी के कारण ओवरनाइट उधारी की लागत पॉलिसी रेपो रेट से नीचे बनी हुई है। इसके चलते आरबीआई बाजार परिचालन के जरिए अतिरिक्त नकदी को अवशोषित कर रहा है। इन कार्रवाइयों से कम अवधि वाले बॉन्ड की यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव पड़ रहा है।

केंद्रीय बैंक अब तक 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लिक्विडिटी वापस ले चुका है। आगे नकदी अवशोषण की रफ्तार और ब्याज दरों में किसी भी अतिरिक्त बढ़ोतरी से यह तय होगा कि यील्ड कर्व कितनी सपाट होती है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सोमवार को अपनी तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक शुरू की। मौद्रिक नीति पर फैसला बुधवार को आने वाला है।

बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या केंद्रीय बैंक फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करेगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा है।

एसबीआई रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा समय में आरबीआई की ओर से 25 आधार अंक की ब्याज दर बढ़ोतरी के पक्ष में जोखिम का संतुलन निर्णायक रूप से झुक गया है। महंगाई के दबाव के बढ़ने, वैश्विक मैक्रो परिस्थितियों के बिगड़ने, लिक्विडिटी की बदलती स्थिति और वैश्विक स्तर पर जोखिमों के नए सिरे से आकलन के कारण समय रहते कदम उठाने की जरूरत और मजबूत हो गई है।

--आईएएनएस

एबीएस

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