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समय पर यूएन का बकाया चुकाएं सभी सदस्य देश, विकास कार्यों के लिए मिले पर्याप्त फंड: भारत

समय पर यूएन का बकाया चुकाएं सभी सदस्य देश, विकास कार्यों के लिए मिले पर्याप्त फंड: भारत
समय पर यूएन का बकाया चुकाएं सभी सदस्य देश, विकास कार्यों के लिए मिले पर्याप्त फंड: भारत

संयुक्त राष्ट्र, 6 अक्टूबर (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा की बजट से जुड़ी पांचवीं समिति की बैठक में सोमवार को भाजपा सांसद बंशीलाल गुर्जर ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के आम बजट में अपना योगदान समय पर दिया है। इसी वजह से भारत को 'ऑनर रोल' में जगह मिली है। भारत ने सभी सदस्य देशों से अपील की है कि वे अपना बकाया समय पर जमा करें। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास से जुड़े कामों के लिए पर्याप्त फंड सुनिश्चित करने की भी मांग की है।

उन्होंने कहा कि सभी सदस्य देशों को अपने हिस्से का तय योगदान पूरा और समय पर देना चाहिए और इसके लिए कोई शर्त नहीं रखनी चाहिए।

उनकी इस टिप्पणी को अमेरिका की ओर इशारे के तौर पर देखा गया। अमेरिका संयुक्त राष्ट्र को दिए जाने वाले अपने बकाए का कुछ हिस्सा रोकता रहा है और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत तय योगदान के भुगतान को लेकर शर्तें रखता रहा है।

संयुक्त राष्ट्र के दो सबसे बड़े योगदानकर्ता अमेरिका और चीन की तरफ से भुगतान में देरी के कारण संगठन वित्तीय संकट के करीब पहुंच गया था। बाद में अमेरिका ने अपने हिस्से का कुछ भुगतान किया जबकि चीन ने पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा की हाई-लेवल बैठक से ठीक पहले इस साल का अपना पूरा बकाया जमा कर दिया।

गुर्जर ने बैठक में हिंदी में अपनी बात रखी। उनके संबोधन का संयुक्त राष्ट्र की पांच आधिकारिक भाषाओं में एक साथ अनुवाद किया गया।

इसी समिति की बैठक में आंध्र प्रदेश से वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की गुम्मा तनुजा रानी ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि महासभा के मौजूदा सत्र के दौरान सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जरूरतों पर जोर दिया और कहा कि इन अहम कामों के लिए पर्याप्त बजट देना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। गुर्जर ने शांति अभियानों के लिए सैनिक और पुलिसकर्मी भेजने वाले देशों को संयुक्त राष्ट्र की ओर से भुगतान में होने वाली देरी पर भी चिंता जताई।

ऐसे ज्यादातर देश विकासशील हैं। समय पर भुगतान नहीं मिलने के कारण उन पर शांति अभियानों का खर्च उठाने का अतिरिक्त दबाव पड़ता है जबकि कुछ सदस्य देश संयुक्त राष्ट्र को अपने हिस्से का भुगतान रोक देते हैं या देर से करते हैं।

गुर्जर ने सदस्य देशों का योगदान तय करते समय उनकी 'भुगतान करने की क्षमता' के सिद्धांत के लिए भारत का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि इस सिद्धांत से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों पर उनकी क्षमता से ज्यादा आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

--आईएएनएस

एवाई/पीएम

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