भारत में वित्त वर्ष 26 में 366 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए जुटाए 1.9 लाख करोड़ रुपए
नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। भारत में 366 कंपनियों ने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) के जरिए वित्त वर्ष 26 में कुल 1.9 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं। इसमें मेनबोर्ड और एसएमई प्लेटफॉर्म पर आए आईपीओ शामिल हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सोमवार को दी गई।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 26 में मेनबोर्ड आईपीओ की लिस्टिंग ऑल-टाइम हाई पर रही है और इस दौरान 109 कंपनियों ने 1.77 लाख करोड़ रुपए जुटाए हैं।
बीते वित्त वर्ष में रिकॉर्ड फंड जुटाने की गतिविधि और लिस्टिंग गेन में कमी एक साथ देखी गई, जो यह दिखाती है कि बाजार अब अधिक समझदार और परिपक्व हो रहा है।
हालांकि, लिस्टिंग से होने वाला मुनाफा और ओवरसब्सक्रिप्शन का स्तर वित्त वर्ष 25 के उच्चतम स्तर से कम हुआ है। इससे पता चलता है कि बाजार अब वैल्यूएशन को लेकर अधिक सतर्क है, जहां आईपीओ की सफलता काफी हद तक सही प्राइसिंग, कमाई की क्वालिटी और संस्थागत भागीदारी पर निर्भर करती है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और सीएफओ एडवाइजरी लीडर, करण मारवाह ने कहा, "आज के आईपीओ मार्केट में सफलता का मतलब सिर्फ लिस्ट होने की क्षमता नहीं है, बल्कि एक पब्लिक कंपनी के तौर पर काम करने की तैयारी है,जिसमें गवर्नेंस, अनुशासन और विश्वसनीयता हो ताकि लिस्टिंग के दिन के बाद भी निवेशकों का भरोसा बना रहे।"
भू-राजनीतिक अनिश्चितता और महंगाई के दबाव के बावजूद, घरेलू स्तर पर मजबूत भागीदारी की वजह से भारत के कैपिटल मार्केट मजबूत बने रहे।
हालांकि, निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा अब अधिक सोच-समझकर तय होने लगी है, क्योंकि मार्केट का मूड ग्लोबल घटनाक्रम, कमोडिटी की कीमतों और करेंसी में उतार-चढ़ाव से ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के रेगुलेटरी सुधारों में आईपीओ इकोसिस्टम में पारदर्शिता, पहुंच और निवेशकों की सुरक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया गया है।
हालांकि मैक्रो-इकोनॉमिक हालात और ग्लोबल घटनाक्रम मार्केट की गतिविधियों पर असर डालते रहेंगे, लेकिन घरेलू स्तर पर मजबूत भागीदारी, संरचनात्मक विकास और निवेशकों के बढ़ते आधार की वजह से भारत की आईपीओ पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है।
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