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बेंगलुरु को डीप-टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बनाएगा कर्नाटक: डीके शिवकुमार

बेंगलुरु को डीप-टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बनाएगा कर्नाटक: डीके शिवकुमार
बेंगलुरु को डीप-टेक्नोलॉजी का ग्लोबल हब बनाएगा कर्नाटक: डीके शिवकुमार

बेंगलुरु, 4 अगस्त (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंगलवार को कहा कि राज्य नैनो-टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सेमीकंडक्टर, बायोटेक्नोलॉजी और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसी 'डीप टेक्नोलॉजी' के लिए बेंगलुरु को एक ग्लोबल हब बनाकर तकनीकी बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।

बेंगलुरु में भारत के प्रमुख इंटरनेशनल नैनो-टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस और एग्जिबिशन 'बेंगलुरु इंडिया नैनो 2026' का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्नाटक का मजबूत इकोसिस्टम, जिसमें प्रमुख रिसर्च संस्थान, स्टार्टअप, मल्टीनेशनल आर एंड डी सेंटर और यूनिवर्सिटीज शामिल हैं। इसे डीप-टेक इनोवेशन के लिए दुनिया का प्रमुख डेस्टिनेशन बनने का खास फायदा देता है।

उन्होंने कहा, "नैनो-टेक्नोलॉजी अब सिर्फ रिसर्च लैबोरेटरी तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी बुनियादी टेक्नोलॉजी बन गई है जो हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी, एग्रीकल्चर, मोबिलिटी, एयरोस्पेस, डिफेंस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव ला रही है।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य एआई, नैनो-टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड मटीरियल्स के मेल से बनेगा। उन्होंने कहा कि कर्नाटक इस टेक्नोलॉजिकल क्रांति में सबसे आगे रहना चाहता है।

बेंगलुरु की वैज्ञानिक विरासत का जिक्र करते हुए, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 1893 में जापान से अमेरिका जाने वाले जहाज पर उद्योगपति जमशेदजी टाटा और स्वामी विवेकानंद के बीच हुई ऐतिहासिक मुलाकात को याद किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक रिसर्च और राष्ट्र-निर्माण पर उनकी बातचीत के कारण ही इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की स्थापना हुई।

उन्होंने बताया कि यह विजन मैसूर के तत्कालीन साम्राज्य के सहयोग से हकीकत बना, जहां महाराजा कृष्ण राजा वाडियार चतुर्थ ने बेंगलुरु में लगभग 370 एकड़ जमीन दान की और संस्थान के लिए वित्तीय और बुनियादी ढांचे से जुड़ी मदद दी।

उन्होंने कहा, "आज देश सिर्फ इन्वेस्टमेंट के लिए नहीं, बल्कि वैज्ञानिक लीडरशिप के लिए भी मुकाबला कर रहे हैं। जो भी एडवांस्ड मटीरियल्स, नैनो-इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी और एआई-आधारित मैन्युफैक्चरिंग में आगे रहेगा, वही आने वाले दशकों की ग्लोबल इकॉनमी को आकार देगा। कर्नाटक उन लीडर्स में शामिल होना चाहता है।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जहां वैज्ञानिक विचार तेजी से लैबोरेटरी से इंडस्ट्री तक और रिसर्च पेपर से कमर्शियल प्रोडक्ट तक पहुंचें और इसके लिए एकेडेमिया, इंडस्ट्री और स्टार्टअप के बीच बेहतर सहयोग हो।

उन्होंने कहा कि नैनो-टेक्नोलॉजी में टारगेटेड ड्रग डिलीवरी और प्रिसिजन मेडिसिन के जरिए हेल्थकेयर में क्रांति लाने, स्मार्ट फर्टिलाइजर और कुशल जल प्रबंधन के साथ एग्रीकल्चर को बेहतर बनाने और साफ एनर्जी, मजबूत बुनियादी ढांचे और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग को संभव बनाने की क्षमता है।

ज्यादा इनोवेशन की जरूरत पर जोर देते हुए शिवकुमार ने ग्लोबल कंपनियों से बेंगलुरु में केवल रूटीन कामकाज से आगे बढ़ने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, "बेंगलुरु ने भारत को दुनिया के आईटी मैप पर जगह दिलाई है। अब समय आ गया है कि भारत को दुनिया के डीप-टेक मैप पर भी स्थापित किया जाए।"

उन्होंने वैज्ञानिक उत्कृष्टता में भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव के जीवनभर के योगदान के लिए उन्हें श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका विजन शोधकर्ताओं की पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

युवा वैज्ञानिकों और छात्रों को संबोधित करते हुए, मुख्यमंत्री ने उनसे बड़े सपने देखने और चुनौतीपूर्ण वैज्ञानिक समस्याओं पर काम करने का आग्रह किया। साथ ही उन्हें सरकार के सहयोग का भरोसा भी दिलाया।

डीके शिवकुमार ने यह भरोसा जताते हुए कहा कि जहां बेंगलुरु ने सॉफ्टवेयर इनोवेशन के जरिए पहले ही भारत की 'सिलिकॉन वैली' के तौर पर अपनी पहचान बना ली है। वहीं इसका अगला अध्याय नैनोटेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, क्वांटम साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी डीप टेक्नोलॉजी के जरिए लिखा जाएगा।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी

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