यूएनजीए में अहम समुद्री रास्तों और जहाजों की सुरक्षा पर जोर, भारत समेत कई देशों ने उठाई आवाज
संयुक्त राष्ट्र, 27 सितंबर (आईएएनएस)। भारत ने समुद्री और खाड़ी देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों की सुरक्षा की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र में कई नेताओं ने चेतावनी दी कि जहाजों पर हमले और अहम समुद्री रास्तों पर आवाजाही में रुकावट से ऊर्जा सप्लाई, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को खतरा पैदा हो रहा है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर कमर्शियल जहाजों तथा उनके चालक दल को निशाना बनाए जाने पर गहरी चिंता जताई।
उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की। साथ ही कहा कि ऊर्जा और व्यापार से जुड़ी चीजों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहनी चाहिए। भारत ने क्षेत्रीय संघर्षों के बीच फंसने वाले जहाजों और नाविकों की सुरक्षा बढ़ाने की भी मांग की।
इस हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा की कई दिनों तक चली आम बहस में कई देशों ने समुद्री सुरक्षा का मुद्दा उठाया। ओमान, सऊदी अरब, बहरीन, सिंगापुर, फिलीपींस और जिबूती समेत कई देशों के मंत्रियों ने कहा कि समुद्री सुरक्षा सिर्फ किसी एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।
ओमान ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही और व्यापार लगभग ठप हो गया है।
ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने कहा कि इस रुकावट का असर ऊर्जा सुरक्षा, कीमतों की स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भरोसे पर पड़ा है।
उन्होंने कहा कि ओमान अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के तहत होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी पक्षों से इस समुद्री रास्ते पर निर्भर देशों के हितों की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील की।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भी खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता को सीधे तौर पर दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार से जोड़ा।
उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही की सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।"
सऊदी अरब ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर किसी तरह की फीस या पाबंदी लगाने का विरोध किया। साथ ही उसने अहम समुद्री रास्तों का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव बनाने के हथियार के तौर पर किए जाने को भी खारिज किया।
बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल जायानी ने कहा कि किसी समुद्री रास्ते में रुकावट का असर सिर्फ उसके किनारे बसे देशों तक सीमित नहीं रहता। उन्होंने कहा कि कोई समुद्री रास्ता सिर्फ तटीय देशों की सुरक्षा से जुड़ा मामला नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन रास्तों से खाना, दवाएं और ऊर्जा एक देश से दूसरे देश तक पहुंचती हैं। अगर इनकी आवाजाही रुकती है, तो इसका असर समुद्र से दूर और चारों तरफ जमीन से घिरे देशों में रहने वाले परिवारों तक भी पहुंचता है।
बहरीन ने अहम स्ट्रेट से जहाजों को गुजरने के लिए परमिट या फीस की व्यवस्था का भी विरोध किया।
फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो ने नाविकों की सुरक्षा को चर्चा के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि दुनिया का करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है, जिसमें लगभग 20 लाख नाविकों की भूमिका होती है। इनमें एक चौथाई से ज्यादा फिलीपींस के नागरिक हैं। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट में हाल में हुई एक घटना का जिक्र किया, जिसमें दो फिलीपींस के नाविकों की मौत हुई और कुछ अन्य घायल हुए।
लाजारो ने कहा, "यह घटना हमें याद दिलाती है कि समुद्री सुरक्षा का मतलब इंसानों की सुरक्षा भी है।"
उन्होंने कहा कि बिना किसी दखल या दबाव के खुले और सुरक्षित समुद्र हमारी सुरक्षा, हमारी अर्थव्यवस्था और हमारे लोगों के लिए बेहद जरूरी हैं।
सिंगापुर ने सिंगापुर स्ट्रेट का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह अलग-अलग देश मिलकर किसी अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित रख सकते हैं।
सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने कहा कि दुनिया के समुद्री व्यापार का करीब एक चौथाई हिस्सा सिंगापुर स्ट्रेट से गुजरता है। उन्होंने कहा कि इसके किनारे बसे तीन देशों की ओर से बनाए गए नियमों ने इस रास्ते को खुला, सुरक्षित और सभी के लिए इस्तेमाल करने लायक बनाए रखने में मदद की है।
सिंगापुर ने समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन को बहुपक्षीय तरीके से अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया।
जिबूती के विदेश मंत्री अब्दुलकादर हुसैन उमर ने लाल सागर को लेकर भी ऐसी ही चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही में किसी भी तरह की रुकावट सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। होर्मुज स्ट्रेट खाड़ी क्षेत्र के तेल और गैस उत्पादक देशों को अरब सागर और हिंद महासागर के जरिए दुनिया के बाजारों से जोड़ता है।
वहीं, बाब अल-मंदेब और लाल सागर का रास्ता हिंद महासागर को स्वेज नहर से जोड़ता है, जबकि मलक्का और सिंगापुर स्ट्रेट हिंद और प्रशांत महासागरों को जोड़ते हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है और उसका व्यापार भी समुद्री रास्तों पर काफी निर्भर है।
इसलिए अगर इन अहम रास्तों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो ईंधन, माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है और सामान पहुंचने में देरी हो सकती है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों के लिए संघर्ष से जुड़े खतरे भी बढ़ सकते हैं।
--आईएएनएस
एवाई/एएस

