भारत ने फुट-एंड-माउथ डिजीज सैट-1 से निपटने की तैयारी की तेज, किया राष्ट्रीय अभ्यास का आयोजन
नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने आईसीएआर-राष्ट्रीय पशु रोग महामारी विज्ञान एवं सूचना विज्ञान संस्थान (आईसीएआर-निवेदी) के सहयोग से फुट-एंड-माउथ डिजीज (एफएमडी) सीरोटाइप सैट-1 के संभावित खतरे से निपटने के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय टेबलटॉप अभ्यास सफलतापूर्वक आयोजित किया। सैट-1 ऐसा वायरस स्ट्रेन है जिसकी भारत में अब तक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अफ्रीका से बाहर पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में इसके प्रसार को देखते हुए इसकी निगरानी बढ़ाई जा रही है। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी साझा की गई।
"डिटेक्ट अर्ली, कन्फर्म फास्ट, कंटेन टुगेदर" विषय पर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य सीमा पार फैलने वाले इस पशु रोग के संभावित प्रवेश की स्थिति में भारत की तैयारियों को मजबूत करना और पशुधन, किसानों की आजीविका तथा देश की पशुधन अर्थव्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
इस अभ्यास में 25 राज्यों, तीन केंद्रशासित प्रदेशों और विभिन्न प्रमुख संस्थानों के कुल 83 प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें राज्य पशुपालन विभाग, आईसीएआर के संस्थान, पशु रोग निदान प्रयोगशालाएं, पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय, वैक्सीन निर्माता कंपनियां तथा रक्षा एवं सीमा सुरक्षा एजेंसियां शामिल रहीं।
अभ्यास के दौरान प्रतिभागियों ने काल्पनिक संक्रमण परिदृश्यों के आधार पर अपनी तैयारियों का परीक्षण किया। इसमें रोग की पहचान, प्रयोगशाला जांच, महामारी विज्ञान संबंधी जांच, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण, आपातकालीन टीकाकरण रणनीतियां, जोखिम संचार और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पशुपालन आयुक्त डॉ. नवीन बी.एम. ने अग्रिम योजना, रोग की शीघ्र पहचान, त्वरित प्रतिक्रिया और केंद्र तथा राज्यों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं आईसीएआर-निवेदी के निदेशक डॉ. बलदेव आर. गुलाटी ने एफएमडी सैट-1 के बदलते महामारी विज्ञान परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि जोखिम आधारित निगरानी, महामारी संबंधी खुफिया जानकारी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली इस प्रकार के रोगों के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
आईसीएआर-राष्ट्रीय फुट-एंड-माउथ डिजीज संस्थान (आईसीएआर-एनआईएफएमडी) के निदेशक डॉ. जे.के. महापात्र ने प्रयोगशाला तैयारियों, त्वरित जांच क्षमता और वैक्सीन उपलब्धता के महत्व को रेखांकित किया। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के ब्रिगेडियर एम.एम. रामचंद्र ने सीमा पार पशु रोगों के प्रवेश को रोकने के लिए सीमा निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
समापन सत्र की अध्यक्षता पशुधन स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त सचिव रामाशंकर सिन्हा ने की। उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर तैयारियों को और मजबूत करने, क्षेत्रीय एफएमडी प्रयोगशालाओं तथा क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और इस दिशा में आईसीएआर-एनआईएफएमडी से तकनीकी सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
--आईएएनएस
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