Samachar Nama
×

ऊर्जा बदलाव में भारत और जर्मनी की साझेदारी मजबूत होगी: जर्मन राजदूत

ऊर्जा बदलाव में भारत और जर्मनी की साझेदारी मजबूत होगी: जर्मन राजदूत
ऊर्जा बदलाव में भारत और जर्मनी की साझेदारी मजबूत होगी: जर्मन राजदूत

नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि पर्यावरण को ज्यादा टिकाऊ और बेहतर बनाया जा सके। भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच यह सहयोग और मजबूत होगा।

आईएएनएस के साथ बातचीत में एकरमैन ने कहा, "भारत और जर्मनी के बीच यह एक बहुत अच्छा सहयोग है, जहां दोनों देश अपनी सोच, विशेषज्ञता और अनुभव को साथ लाकर एक बेहतर और टिकाऊ पर्यावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें स्वच्छ ऊर्जा भी शामिल है और हम भारत के साथ इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में भारत और जर्मनी के बीच यह रिश्ता और गहरा होगा।"

ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की ज्यादा भागीदारी के महत्व पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर और सोचने की जरूरत है। उन्होंने कहा, "हमें इस बारे में ज्यादा ध्यान देना चाहिए और यह इस पर विचार करने का अच्छा समय है। हमें अपनी योजनाओं और चर्चाओं में महिलाओं को आगे लाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए, क्योंकि ऊर्जा बदलाव की प्रक्रिया महिलाओं के बिना सफल नहीं हो सकती।"

राजदूत ने मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को देखते हुए भारत और जर्मनी दोनों के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी एक क्षेत्र पर ज्यादा निर्भर रहना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा, "मध्य पूर्व में पिछले कुछ घंटों में जो चिंताजनक घटनाएं हुई हैं, उन्हें हमने देखा है। हमें उम्मीद है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान निकलेगा। लोग फिर से बातचीत की मेज पर लौटें और बिना हिंसा के कोई रास्ता निकालें। यह भारत और जर्मनी दोनों के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि हमें अपनी ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान देना होगा, क्योंकि किसी एक क्षेत्र पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है।"

उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक प्रयासों के जरिए हालात जल्द सामान्य होने चाहिए ताकि होर्मुज स्‍ट्रेट खुला रहे। उनके अनुसार, मौजूदा स्थिति में ऊर्जा सुरक्षा पर ध्यान देना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

एकरमैन ने कहा, "खाड़ी क्षेत्र में जो हो रहा है, उससे यह साफ होता है कि भारत और जर्मनी जैसे देश, जिनके पास प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं, उन्हें यह सोचना होगा कि वे अपनी ऊर्जा जरूरतें कैसे पूरी करें ताकि वे विदेशी जीवाश्म ईंधन और अन्य ईंधनों पर कम निर्भर रहें। इस मुद्दे पर हमें भारत के साथ बैठकर चर्चा करनी होगी।"

--आईएएनएस

एवाई/डीकेपी

Share this story

Tags