वैश्विक तनाव के बीच मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा भारत: वी. अनंत नागेश्वरन
वॉशिंगटन, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत को वैश्विक संघर्ष और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बढ़ते जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन वह एक मजबूत मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति के साथ नए वित्त वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह बात मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कही।
यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम 2026 में बोलते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार का 6.5 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ का अनुमान थोड़ा कम भी हो सकता है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अभी अनिश्चितता बहुत ज्यादा है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि वैश्विक तनाव का असर भारत पर चार बड़े तरीकों से पड़ रहा है: ऊर्जा की कीमतें बढ़ना, व्यापार में रुकावट, लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस का खर्च बढ़ना और विदेश से आने वाले पैसों (रेमिटेंस) में कमी।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तेल की कीमत का मामला नहीं है, बल्कि उन सभी जरूरी चीजों की कीमत का है जो हमारे लिए अहम हैं। उन्होंने बताया कि मार्च में भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत करीब 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष खत्म भी हो जाए तो भी हालात सामान्य होने में समय लग सकता है। संघर्ष खत्म होना एक बात है, लेकिन ऊर्जा बाजार का पूरी तरह सामान्य होना दूसरी बात है।
रेमिटेंस पर भी असर पड़ सकता है। भारत को 2024-25 में करीब 124 अरब डॉलर मिले, जिनमें से लगभग आधा पैसा खाड़ी देशों से आता है। अगर वहां कोई दिक्कत हुई तो 5-10 अरब डॉलर तक की कमी आ सकती है।
उन्होंने कहा कि इन जोखिमों के बावजूद, नागेश्वरन ने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत है। हम इन चुनौतियों का सामना एक मजबूत आधार के साथ कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि देश में लगातार अच्छी ग्रोथ हो रही है, महंगाई काबू में है और सरकारी वित्तीय स्थिति भी बेहतर हो रही है। मार्च 2026 तक खत्म होने वाले साल में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिसमें खेती, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर तीनों का योगदान है।
उन्होंने यूके, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के साथ अपने रिश्ते बढ़ाए हैं और नए समझौते किए हैं। भारत का बाजार विदेशी सामान और सेवाओं के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि ये समझौते बाहरी झटकों से बचाने में मदद करेंगे और भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में भूमिका को मजबूत करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार का पूंजीगत खर्च पिछले कुछ सालों में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है।
उन्होंने कुछ चुनौतियों की भी बात की, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का नौकरियों पर असर। उन्होंने कहा कि इसका हल यह है कि हम ऐसे सेक्टर में नौकरियां पैदा करें जो एआई से कम प्रभावित हों।
उन्होंने हेल्थकेयर, हॉस्पिटैलिटी और बुजुर्गों की देखभाल जैसे सेक्टर में ज्यादा रोजगार बनाने और स्किल ट्रेनिंग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम की ओर से आयोजित यूएस-इंडिया इकोनॉमिक फोरम में नीति निर्माताओं और इंडस्ट्री के लोगों ने मिलकर भारत-अमेरिका संबंधों और आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा की।
--आईएएनएस
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