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वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत, जून में पीएमआई 57.4 पर रहा

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत में निजी क्षेत्र की गतिविधियां जून में मजबूत रही हैं और इस दौरान नए ऑर्डर्स में बढ़ोतरी देखी गई है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एचएसबीसी पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) डेटा में दी गई।
वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत, जून में पीएमआई 57.4 पर रहा

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के बीच भी भारत में निजी क्षेत्र की गतिविधियां जून में मजबूत रही हैं और इस दौरान नए ऑर्डर्स में बढ़ोतरी देखी गई है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एचएसबीसी पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) डेटा में दी गई।

एचएसबीसी फ्लैश पीएमआई डेटा के मुताबिक, जून में भारतीय सामान और सेवाओं की मांग में वृद्धि धीमी हुई है, जिससे आउटपुट लेवल बढ़ाने की गुंजाइश सीमित हो गई। वहीं, कुछ महीनों की तेजी के बाद इन्वेंट्री बनाने की रफ्तार धीमी पड़ने से मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट की ग्रोथ में कमी आई है।

एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स जून में घटकर 57.4 रहा है, जो कि मई में 59.3 था।

जब भी पीएमआई 50 से ऊपर होता है तो यह आर्थिक गतिविधियों में तेजी को दिखाता है।

पीएमआई डेटा में बताया गया कि लागत दबाव और मांग में कमी के कारण आर्थिक गतिविधियों में हालिया तेजी में कमी आई है।

एचएसबीसी में भारत के लिए मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, "जून में निजी क्षेत्र की गतिविधियों में थोड़ी नरमी आई। नए निर्यात ऑर्डर मजबूत बने रहे और ऑर्डर-टू-इन्वेंट्री रेश्यो में बढ़ोतरी हुई, जो आगे भी मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों के मजबूत रहने का संकेत है। प्राइवेट सेक्टर में इनपुट लागत बढ़ी, लेकिन यह बढ़ोतरी पिछले पांच महीनों में सबसे धीमी रही।"

पीएमआई सर्वेक्षण में निजी क्षेत्र की कंपनियों ने लगातार हर महीने अपने खर्चों में बढ़ोतरी की बात कही है, और इसकी वजह कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को बताया है।

खास तौर पर, सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने केमिकल, खाने-पीने की चीजों, ईंधन, गैस, मेटल और यूटिलिटी (बिजली-पानी जैसी सेवाओं) की बढ़ती लागत का जिक्र किया। इसके बावजूद, महंगाई की कुल दर लगातार तीसरे महीने कम हुई और जनवरी के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गई।

पीएमआई डेटा के मुताबिक, सर्विस सेक्टर के मुकाबले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत का दबाव अधिक रहा।

जून में निर्यात के रुझान मिले-जुले रहे; सेवा क्षेत्र में तेजी से बढ़ोतरी हुई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मार्च 2023 के बाद सबसे कम बढ़ोतरी देखी गई।

कंपनियों को भरोसा है कि आने वाले 12 महीनों में मौजूदा स्तर के मुकाबले उत्पादन में तेज बढ़ोतरी होगी।

--आईएएनएस

एबीएस

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