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भारत-कनाडा रिश्तों में सुधार, बेहद दोस्ताना दौर में पहुंचे संबंध, पीयूष गोयल के दौरे से पहले बोले उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

वाशिंगटन, 25 मई (आईएएनएस)। भारत और कनाडा के रिश्ते अब तनावपूर्ण दौर से निकलकर बेहद दोस्ताना चरण में पहुंच गए हैं। अब दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां, राजनीतिक नेतृत्व और कारोबारी समुदाय आपस में मिलकर काम कर रहे हैं। यह बात कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कही।
भारत-कनाडा रिश्तों में सुधार, बेहद दोस्ताना दौर में पहुंचे संबंध, पीयूष गोयल के दौरे से पहले बोले उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक (आईएएनएस एक्सक्लूसिव)

वाशिंगटन, 25 मई (आईएएनएस)। भारत और कनाडा के रिश्ते अब तनावपूर्ण दौर से निकलकर बेहद दोस्ताना चरण में पहुंच गए हैं। अब दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां, राजनीतिक नेतृत्व और कारोबारी समुदाय आपस में मिलकर काम कर रहे हैं। यह बात कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कही।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के दौरे से पहले एक इंटरव्यू में पटनायक ने आईएएनएस को बताया, "पिछले कुछ महीनों में संबंध सच में दुश्मनी से बहुत दोस्ताना हो गए हैं। अभी सब कुछ ठीक चल रहा है।" उन्होंने इसे आपसी संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत बताया।

कनाडा में भारत के उच्चायुक्त ने यह बात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की कनाडा यात्रा से पहले कही। उन्होंने इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों में एक नए दौर की शुरुआत बताया।

पटनायक ने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल होगा, जिसमें 100 से अधिक भारतीय कारोबारी कनाडा पहुंचेंगे। वे कनाडाई उद्योग संगठनों, पेंशन फंड, बैंकों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और भारतीय मूल के समुदाय के नेताओं से मुलाकात करेंगे। एक साल पहले तक कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि कोई भारतीय मंत्री 100 से ज्यादा प्रतिनिधियों के साथ कनाडा आएगा।

उच्चायुक्त के मुताबिक, पीयूष गोयल की यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक सहयोग को तेज करना और प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाना है। यात्रा का मकसद यह संदेश देना है कि अब हम अपने आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों को बहुत ऊंचाई तक ले जाने जा रहे हैं।”

पटनायक ने बताया कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 32 अरब कनाडाई डॉलर यानी लगभग 25 अरब अमेरिकी डॉलर का है और अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। हम 2030 या 2031 तक इसे लगभग 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने की उम्मीद कर रहे हैं।

उच्चायुक्त ने कहा कि दोनों सरकारों ने “अतीत की समस्याओं को पीछे छोड़ते हुए सुरक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग फिर से शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच बातचीत हुई है। एजेंसियां, पुलिस बल और जांच एजेंसियां एक-दूसरे के संपर्क में हैं।

दिनेश के. पटनायक ने कहा कि दोनों देश अब यह सुनिश्चित करने पर काम कर रहे हैं कि कनाडा भारत के लिए सुरक्षित हो और भारत कनाडा के लिए सुरक्षित हो। खालिस्तान समर्थक चरमपंथी और आपराधिक नेटवर्क का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कनाडा अब इस समस्या को अपने घरेलू मुद्दे के रूप में देखने लगा है। उन्होंने कहा, “पिछले छह-सात महीनों में कनाडा की मदद, खासकर प्रधानमंत्री कार्नी के सहयोग से हम इन तत्वों को फिर से हाशिए पर धकेलने में सफल हुए हैं।”

पटनायक ने आरोप लगाया कि कुछ चरमपंथी समूह अब विचारधारा से ज्यादा “आर्थिक गतिविधियों” के जरिए सक्रिय हैं। उन्होंने हथियारों की तस्करी, ड्रग्स तस्करी, मानव तस्करी, वसूली और संगठित अपराध का उल्लेख किया। उन्होंने ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक, कृषि-खाद्य क्षेत्र, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम रिसर्च और रक्षा सहयोग को भविष्य के प्रमुख विकास क्षेत्रों के रूप में बताया।

आव्रजन नीति पर उन्होंने माना कि कनाडा की हालिया नीतियों का असर कई भारतीयों पर पड़ा है, लेकिन उन्होंने कहा कि भारत के प्रति कोई नकारात्मक भावना नहीं है। उन्होंने कहा, “उन्होंने आव्रजन प्रणाली को ऐसे लोगों के हाथों में जाने दिया, जो उसका दुरुपयोग कर सकते थे। अब वे ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें अच्छे प्रवासियों का लाभ मिले और गलत तत्वों को रोका जा सके।”

पटनायक ने कहा, “भारतीयों को चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहां के लोग उनके बारे में अच्छी राय रखते हैं।”

भारत-कनाडा संबंध 2023 में उस समय बिगड़ गए थे, जब पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो ने ब्रिटिश कोलंबिया में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया था। भारत ने इन आरोपों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया था और कनाडा पर चरमपंथी एवं भारत विरोधी तत्वों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।

--आईएएनएस

केके/वीसी

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