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संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा न करके इंडिया ब्लॉक अराजकता फैला रहा है: अर्जुन राम मेघवाल

संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा न करके इंडिया ब्लॉक अराजकता फैला रहा है: अर्जुन राम मेघवाल
संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा न करके इंडिया ब्लॉक अराजकता फैला रहा है: अर्जुन राम मेघवाल

नई दिल्ली, 4 नवंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बुधवार को इंडिया ब्लॉक पर संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा न करके 'अराजकता फैलाने' का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले महीने दिल्ली में विपक्षी गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया।

दिल्ली में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली को संबोधित करते हुए मेघवाल ने कहा, "मैं दिल्ली में 6, 7, 9, 10, 11, 12 और 13 अक्टूबर को हुई तीन-चार घटनाओं का जिक्र करूंगा।"

उन्होंने याद दिलाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते थे।

उन्होंने टिप्पणी की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे और कहा कि वे उनसे मिलेंगे। हालांकि, उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के नाम नहीं दिए और इसके बजाय आकाशवाणी भवन में जमा हो गए। अराजकता फैलाने का यह पहला उदाहरण था।

कांग्रेस से सवाल करते हुए कानून मंत्री ने पूछा कि आपके शासनकाल में क्या कभी 300 सांसद या पूर्व सांसद एक साथ मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले थे? इसका मतलब है कि वे अराजकता फैलाने के लिए तैयार थे।

आलोचना को आगे बढ़ाते हुए मेघवाल ने कहा कि अक्टूबर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिलने के लिए इंडिया ब्लॉक के नेताओं का राष्ट्रपति भवन तक मार्च करना 'अराजकता की पराकाष्ठा' थी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने उनसे चुनावी अनियमितताओं के सबूत पेश करने को भी कहा था, लेकिन उन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

कानून मंत्री ने विपक्षी गठबंधन के सर्वोच्च न्यायालय तक निर्धारित मार्च से एक दिन पहले, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत द्वारा इंडिया ब्लॉक के नेताओं से मिलने से इनकार करने का भी हवाला दिया।

सीजेआई ने कथित तौर पर कहा कि अदालत को प्रशासनिक स्तर पर किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से इस तरह मिलने का कोई अधिकार नहीं है, और वास्तव में उसकी शक्ति याचिका की सुनवाई करना और फैसला सुनाना है। उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा था कि जिन मुद्दों को वे उठाने की योजना बना रहे हैं, वे पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं।

--आईएएनएस

एमएस/

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