ब्रिक्स विज्ञान मंत्रियों की बैठक में सर्वसम्मति से अपनाई गई 'चेन्नई घोषणा', विज्ञान और नवाचार सहयोग को मिलेगा नया आयाम: डॉ. जितेंद्र सिंह
नई दिल्ली, 22 अगस्त (आईएएनएस)। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को घोषणा की कि ब्रिक्स देशों ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से 'चेन्नई घोषणा' को सर्वसम्मति से अपनाया है। यह घोषणा ब्रिक्स देशों के बीच एक प्रभावी, लचीला और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ढांचा विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान अपनाई गई 'चेन्नई सहमति' विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) सहयोग के केंद्र में जन-केंद्रित और मानवता-पहले दृष्टिकोण को रखती है, जिसमें सतत विकास, मजबूत और उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक वृद्धि, सामाजिक समावेशन तथा लोगों के जीवनस्तर और कल्याण में सुधार के लिए नवाचार एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष बल दिया गया है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि बैठक की चर्चाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार अधिक लचीले, समावेशी और टिकाऊ भविष्य के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, उन्नत सामग्री, जैव प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे विषयों पर हुई व्यापक चर्चा यह दर्शाती है कि ब्रिक्स देशों के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों का सामूहिक प्रयासों से समाधान किया जा सकता है।
चेन्नई सहमति में ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सहयोग की बढ़ती परिपक्वता और गहराई को भी दर्ज किया गया है। इसके अंतर्गत 14 विषयगत कार्य समूहों में लगातार सहयोग, ब्रिक्स युवा वैज्ञानिक मंच के 11 संस्करण, युवा नवोन्मेषक पुरस्कार के 9 संस्करण और ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार रूपरेखा कार्यक्रम के 9 दौर सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं।
घोषणा में कहा गया है कि ये उपलब्धियां ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी की बढ़ती मजबूती, निवेश और सदस्य देशों की निरंतर भागीदारी को दर्शाती हैं।
चेन्नई सहमति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग की प्राथमिकताओं की समीक्षा और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों का भी स्वागत किया गया है, जिसमें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप अधिक सक्षम और आधुनिक सहयोग ढांचा विकसित करने की दिशा में चल रहे परामर्श कार्यों का उल्लेख किया गया है।
घोषणा में ब्रिक्स युवा स्टार्टअप मंच का भी स्वागत किया गया है। साथ ही शुरुआती और विकासशील चरण के स्टार्टअप्स के लिए वित्तपोषण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष के प्रस्ताव पर विचार का समर्थन किया गया है। यह पहल उद्योग मंत्रियों की घोषणा में भी शामिल की गई है और आवश्यकता पड़ने पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी ट्रैक के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी को केवल संवाद तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे ठोस परिणाम देने वाली साझेदारी में बदलना होगा। इसके लिए संयुक्त परियोजनाओं, साझा मंचों, समन्वित अनुसंधान कार्यक्रमों और खुली अनुसंधान अवसंरचना जैसी व्यवस्थाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
--आईएएनएस
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