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एजेंसियों की चेतावनी, स्वतंत्र पश्चिम बंगाल की मांग आईएसआई की साजिश का हिस्सा

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी नेता मोहम्मद नूरुल हुदा ने ममता बनर्जी के सीएम पद से इस्तीफे न देने के फैसले का समर्थन करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उसका यह बयान खुफिया एजेंसियों द्वारा पश्चिम बंगाल में संभावित उकसावों की चेतावनी दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है।
एजेंसियों की चेतावनी, स्वतंत्र पश्चिम बंगाल की मांग आईएसआई की साजिश का हिस्सा

नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। जमात-ए-इस्लामी नेता मोहम्मद नूरुल हुदा ने ममता बनर्जी के सीएम पद से इस्तीफे न देने के फैसले का समर्थन करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उसका यह बयान खुफिया एजेंसियों द्वारा पश्चिम बंगाल में संभावित उकसावों की चेतावनी दिए जाने के कुछ ही दिनों बाद आया है।

नूरुल हुदा ने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे विधानसभा चुनाव परिणामों को स्वीकार न करें, बल्कि पश्चिम बंगाल को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करें।

एजेंसियों का कहना है कि हुदा का बयान रणनीतिक रूप से योजनाबद्ध है और इसका उद्देश्य कुछ बड़ा है।

बांग्लादेश में हुए चुनावों में जमात ने पश्चिम बंगाल से सटी सीमावर्ती सीटों पर बहुमत हासिल किया। एजेंसियों ने तब चेतावनी दी थी कि आईएसआई के समर्थन वाली जमात पश्चिम बंगाल में तनाव भड़काने की कोशिश करेगी।

खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने की मांग आईएसआई की एक पुरानी चाल है। कुछ साल पहले एजेंसियों ने मुर्शिदाबाद को पश्चिम बंगाल से स्वतंत्र घोषित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक नियोजित आंदोलन को विफल कर दिया था।

आईएसआई जमात के कई कट्टरपंथियों के संपर्क में है और उन्हें पश्चिम बंगाल में अशांति फैलाने के निर्देश दे रही है। अधिकारी ने बताया कि ये लोग जम्मू-कश्मीर की तरह ही पश्चिम बंगाल में भी आंदोलन शुरू करना चाहते हैं।

अधिकारी ने आगे कहा कि योजना यह है कि एक अभियान चलाया जाए, जिसमें यह कहा जाए कि पश्चिम बंगाल के चुनाव में धांधली हुई थी और अब वहां कोई लोकतंत्र नहीं बचा है।

अधिकारी ने यह भी कहा कि आईएसआई को उम्मीद है कि यह एक जन आंदोलन बन जाएगा और इससे उन्हें सत्ता में तनाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान भी आईएसआई समर्थित तत्वों ने राज्य में अशांति फैलाने की कई योजनाएं बनाई थीं। उन्होंने झूठे अभियान चलाने की कोशिश की, जिनमें यह जताने का प्रयास किया गया कि भाजपा चुनाव में धांधली करने की कोशिश करेगी।

हालांकि, राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते प्रक्रिया सुचारू रूप से चलती रही। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि फर्जी प्रचार अभियान भी नाकाम रहे, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर मतदान करने के लिए निकले।

पश्चिम बंगाल में शांति और सद्भाव भंग करने के लिए आईएसआई समर्थित तत्व भारत-बांग्लादेश संबंधों को भी पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। चुनावों के बाद संबंधों में काफी सुधार हुआ है और तारिक रहमान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री बने हैं। यह बात आईएसआई को रास नहीं आई है और वह किसी भी कीमत पर इन संबंधों को बिगाड़ना चाहता है। एक अधिकारी ने बताया कि हुदा के ऐसे बयान इसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।

अधिकारियों का कहना है कि वे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रख रहे हैं और पश्चिम बंगाल में हिंसा भड़काने और अस्थिरता पैदा करने के किसी भी प्रयास को विफल कर देंगे। हुदा ने यह भी कहा कि अगर ममता बनर्जी भारत से बंगाल के अलग होने की घोषणा करती हैं तो बांग्लादेश के मुसलमान उनका समर्थन करेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई के इशारे पर जमात हमेशा से इस तरह की साजिश करने की कोशिश करती रही है। वह पश्चिम बंगाल को अस्थिर करना चाहती है और फिर पूर्वोत्तर राज्यों की ओर बढ़ना चाहती है।

अधिकारियों का कहना है कि आईएसआई राज्य में राजनीतिक तनाव को बरकरार रखना चाहती है। वह इस बात पर जोर देगी कि ऐसे कट्टरपंथी भड़काऊ बयान दें और राज्य में हर समय अशांति का माहौल बनाए रखें।

ये कट्टरपंथी चुनाव परिणामों पर चर्चा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनकी योजना एक जन आंदोलन शुरू करने की है, जिसके तहत पश्चिम बंगाल को भारत से आजादी दिलाने की मांग की जाएगी। एक अधिकारी ने बताया कि यह काफी हद तक वैसा ही है जैसा आईएसआई जम्मू-कश्मीर और पंजाब में करने की कोशिश करती है।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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