यूपी से भाजपा के राज्यसभा नॉमिनेशन में हरदीप सिंह पुरी और 6 अन्य मौजूदा सांसदों के नाम नहीं
लखनऊ, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए आठ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। पार्टी ने जातिगत प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक अनुभव के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। इस लिस्ट में दो महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व में विकास पर पार्टी के जोर को दिखाता है।
हालांकि, इस लिस्ट में सबसे चौंकाने वाली बात केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम न होना है। उनके अलावा, एक और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और अन्य सभी मौजूदा सांसदों को भी नॉमिनेशन में जगह नहीं मिली है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का उच्च सदन (राज्यसभा) में कार्यकाल अगले महीने खत्म होने वाला है।
जिन अन्य मौजूदा राज्यसभा सांसदों को लिस्ट में जगह नहीं मिली, उनमें अरुण सिंह, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, बृज लाल और गीता शाक्या शामिल हैं।
16 अक्टूबर को होने वाले चुनावों के लिए पार्टी ने आठ नामों की घोषणा की, जिनमें दो महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। इन नामों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडे, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं।
भाजपा की इस लिस्ट में तीन ओबीसी उम्मीदवार, दो अनुसूचित जाति (एससी) के उम्मीदवार और तीन सवर्ण (उच्च जाति) उम्मीदवार शामिल हैं।
बरेली जिले की आंवला सीट से भाजपा विधायक धर्मपाल सिंह, बुंदेलखंड इलाके के असरदार लोध समुदाय का एक जाना-माना चेहरा हैं। वह योगी आदित्यनाथ सरकार में दो बार मंत्री रह चुके हैं।
राम प्रताप सिंह चौहान राज्य भाजपा के महासचिव हैं और राज्य में पार्टी के कई अहम अभियानों की देखरेख करते हैं।
इस लिस्ट में ओबीसी उम्मीदवार लोधी, पाल और कुर्मी समुदायों से हैं, जबकि ऊंची जातियों के उम्मीदवारों में दो ब्राह्मण और एक राजपूत शामिल हैं।
महिला उम्मीदवारों में झारखंड के गवर्नर संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत शामिल हैं। प्रियंका ने 2014 में कांग्रेस के दिग्गज नेता पीएल पुनिया को हराकर लोकसभा सीट जीती थी।
द्विवार्षिक चुनावों के लिए जातियों के समीकरणों की यह 'सोशल इंजीनियरिंग' अगले साल होने वाले अहम विधानसभा चुनावों पर पार्टी के फोकस को भी दिखाती है।
--आईएएनएस
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