आईएमएफ ने पाकिस्तान को 1.21 अरब डॉलर की वित्तीय मदद के लिए जताई सहमति, भू-राजनीतिक तनाव पर चेतावनी भी दी
वॉशिंगटन, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और पाकिस्तान के बीच स्टाफ-लेवल पर एक समझौता हुआ है। इससे पाकिस्तान को करीब 1.21 अरब डॉलर की अतिरिक्त वित्तीय मदद मिलने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की ऊंची कीमतें और व्यापार में रुकावटें पाकिस्तान की आर्थिक रिकवरी के लिए अब भी बड़ा खतरा हैं।
आईएमएफ ने बुधवार को बताया कि यह समझौता पाकिस्तान के 37 महीने के 'एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी' (ईएफएफ) की चौथी समीक्षा और 28 महीने की रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (आरएसएफ) की तीसरी समीक्षा से जुड़ा है।
पाकिस्तान को पैसा मिलने से पहले इस समझौते को इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के एग्जीक्यूटिव बोर्ड की मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को ईएफएफ के तहत करीब एक अरब डॉलर और आरएसएफ के तहत करीब 21 करोड़ डॉलर मिल सकेंगे।
इसके बाद दोनों कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को मिलने वाली कुल रकम करीब 5.7 अरब डॉलर हो जाएगी।
इवा पेट्रोवा के नेतृत्व में इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की एक टीम ने 23 सितंबर से सात अक्टूबर तक कराची और इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ बातचीत की। यह बातचीत पाकिस्तान की सालाना आर्थिक समीक्षा और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड कार्यक्रमों की समीक्षा के तहत हुई।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 3.6 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतों और सप्लाई में रुकावटों की वजह से आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर असर पड़ा। वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर चार प्रतिशत रही।
मई में महंगाई चरम पर पहुंचने के बाद इसमें कमी आई और सितंबर में यह करीब 10.3 प्रतिशत रही। वहीं, विदेशों से आने वाली मजबूत रेमिटेंस की वजह से चालू खाते की स्थिति मोटे तौर पर संतुलित रही। सितंबर के आखिर तक पाकिस्तान का कुल विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर करीब 21.5 अरब डॉलर हो गया।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने कहा कि पाकिस्तान की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग में सुधार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों तक दोबारा पहुंच से पता चलता है कि उसकी आर्थिक नीतियों पर भरोसा बढ़ा है। हालांकि, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने चेतावनी दी कि आर्थिक सुधार की यह रफ्तार बाहरी झटकों से प्रभावित हो सकती है।
इवा पेट्रोवा ने कहा, "इसके बावजूद जोखिम काफी ज्यादा हैं। खासतौर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक स्तर पर सख्त वित्तीय हालात और व्यापार में रुकावटें बड़े जोखिम बने हुए हैं।"
आईएमएफ ने पाकिस्तान से वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वित्त वर्ष 2026-27 के बजट को लागू करने को कहा है। इसमें जीडीपी के दो प्रतिशत के मूल प्राथमिक सरप्लस का लक्ष्य भी शामिल है। आईएमएफ ने टैक्स वसूली की व्यवस्था में सुधार करने को भी कहा है। इसमें जोखिम के आधार पर ऑडिट, डिजिटल इनवॉइस और टैक्स वसूली मजबूत करने के लिए थर्ड-पार्टी जानकारी का इस्तेमाल शामिल है।
आईएमएफ ने सरकारी वित्त प्रबंधन, खरीद प्रक्रिया और सरकारी नकदी के मैनेजमेंट में भी सुधार पर जोर दिया है, ताकि कर्ज लेने की लागत और पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नया कर्ज लेने से जुड़े जोखिम कम किए जा सकें।
सामाजिक खर्च को लेकर आईएमएफ ने कहा कि पाकिस्तान ने स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च वित्त वर्ष 2023-24 में जीडीपी के 2.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वित्त वर्ष 2025-26 में 2.5 प्रतिशत कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 में इसे बढ़ाकर 2.8 प्रतिशत करने की योजना है।
आईएमएफ ने जरूरतमंद लोगों को सीधे नकद मदद बढ़ाने का स्वागत किया। हालांकि, उसने मौजूदा फ्यूल सपोर्ट स्कीम को जल्द खत्म करने की सलाह दी, क्योंकि इसकी लागत ज्यादा है और इसका दायरा काफी बड़ा है। आईएमएफ ने स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान से भी कहा कि वह ब्याज दरों और दूसरी मौद्रिक नीतियों में तब तक जरूरी सख्ती बनाए रखे, जब तक महंगाई लगातार तय लक्ष्य के दायरे में नहीं आ जाती।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार भी आईएमएफ की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। इनमें समय पर बिजली दरों में बदलाव, कामकाज की क्षमता बढ़ाना, बिजली वितरण में ज्यादा प्रतिस्पर्धा लाना और सर्कुलर डेट को दोबारा बढ़ने से रोकने के कदम शामिल हैं।
--आईएएनएस
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