कर्नाटक : राज्य की वित्तीय स्थिति पर विजयेंद्र ने सीएम सिद्दारमैया पर साधा निशाना, कहा- आइए मिलकर हर जिले का दौरा करें
बेंगलुरु, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक में उपचुनाव प्रचार के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीवाई विजयेंद्र ने बुधवार को मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर निशाना साधा और उन्हें खुले मंच पर बहस की चुनौती दी।
भाजपा विधायक बीवाई विजयेंद्र ने कहा, "अगर राज्य की आर्थिक स्थिति वास्तव में मजबूत है, तो आइए हम दोनों हर जिले में साथ चलें। जनता के सामने खड़े होकर चर्चा करें कि आपकी योजनाओं से कितने लोगों को फायदा हुआ और किसानों व मजदूर वर्ग को कितना समर्थन मिला।"
उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने अपने कार्यकाल में कई बजट पेश करने को उपलब्धि बताया था। विजयेंद्र ने कहा कि सिर्फ बजट पेश करना कोई उपलब्धि नहीं है और यह व्हाइट पेपर का विकल्प भी नहीं हो सकता। इस सरकार की असली उपलब्धि राज्य को कर्ज के जाल में धकेलना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पारदर्शिता की मांग से परेशान नजर आ रहे हैं और उन्हें बजट और व्हाइट पेपर के बीच का अंतर समझना चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "व्हाइट पेपर साफ और सटीक तथ्यों को बिना छुपाए सामने रखता है। जरूरत पड़े तो अपने विभाग के आर्थिक विशेषज्ञों से सलाह लें।"
राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता जताते हुए विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता सेनानियों की पेंशन के भुगतान में देरी हो रही है, जो खाली खजाने की हकीकत को दिखाता है, भले ही सरकार आंकड़ों में कुछ और दिखा रही हो।
उन्होंने दावा किया कि कर्नाटक पर कुल कर्ज 8.14 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है और वित्त वर्ष 2025-26 में ही 48,000 करोड़ रुपए ब्याज के रूप में चुकाए गए हैं। कर्ज बढ़ता जा रहा है जबकि विकास नगण्य है। यह वित्तीय कुप्रबंधन का संकेत है।
विजयेंद्र ने सरकार पर अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्गों के लिए निर्धारित फंड को अपनी गारंटी योजनाओं में इस्तेमाल करने का भी आरोप लगाया और इसे इन समुदायों के साथ गंभीर अन्याय बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि आंतरिक आरक्षण से जुड़ी नीतियां समाज में विभाजन पैदा कर रही हैं।
बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 2.85 लाख सरकारी पद खाली हैं, जिनमें से 5,000 पद महत्वपूर्ण विभागों में हैं। 56,000 पद भरने की घोषणा के बावजूद भर्ती में देरी हो रही है, जिससे बेरोजगार युवाओं को प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है।
शिक्षा क्षेत्र में भी उन्होंने समस्याएं गिनाईं और आरोप लगाया कि गेस्ट लेक्चरर्स को महीनों से वेतन नहीं मिला है। साथ ही पिछड़े और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और हॉस्टल सुविधाओं में भी कमी की बात कही।
कृषि क्षेत्र को लेकर उन्होंने कहा कि अपर कृष्णा परियोजना से प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं शराब की दुकानों के विस्तार को उन्होंने राजस्व बढ़ाने की कोशिश बताया।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मंगलवार को इस मांगों को खारिज करते हुए कहा था कि यह आर्थिक समझ की कमी, प्रशासनिक अनुभव की कमी और राजनीतिक हताशा का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश किया गया राज्य बजट ही सरकार की वित्तीय स्थिति का पारदर्शी और ईमानदार दस्तावेज है, जिस पर विधानसभा के दोनों सदनों में चर्चा हो चुकी है और विपक्ष के सवालों के जवाब भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर अब भी कोई शंका है, तो वे उसे स्पष्ट करने और खुले मंच पर बहस के लिए तैयार हैं।
--आईएएनएस
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