आईसीएआर भारत में कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने में अग्रणी है : शिवराज सिंह चौहान
नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने पिछले वर्ष 44 फसलों की 386 नई और बेहतर किस्में विकसित की हैं। इनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु के अनुकूल हैं, जबकि 29 किस्में बायो-फोर्टिफाइड हैं।
केंद्रीय मंत्री ने गुरुवार को आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस के मौके पर 43 नई उन्नत फसल किस्मों, 17 कृषि तकनीकों और 14 प्रकाशनों का विमोचन किया।
नई तकनीकों में बासमती चावल की उन्नत किस्में, खारी और क्षारीय मिट्टी में उगने वाली जलवायु-अनुकूल चावल की किस्में, आम के निर्यात के लिए नई उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस और छोटे किसानों के लिए कम लागत वाला कसावा हार्वेस्टर शामिल हैं।
150 अस्थायी दैनिक मजदूरों को भी नियुक्ति पत्र दिए गए, जिससे उनकी सेवाएं नियमित हो गईं।
तकनीक के व्यावसायीकरण और 'लास्ट-माइल डिलीवरी' को तेज करने के लिए 51 उद्योग भागीदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इससे आईसीएआर से विकसित तकनीकें किसानों तक तेजी से पहुंच सकेंगी।
स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने जलवायु-अनुकूल खेती, दालों और तिलहन में आत्मनिर्भरता, बेहतर कृषि शिक्षा, नई तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के नेटवर्क के जरिए नवाचारों को व्यापक स्तर पर फैलाने की जरूरत पर जोर दिया।
केंद्रीय मंत्री ने आईसीएआर को भारत के कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने वाला प्रमुख संस्थान बताया। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिकों के शोध और नवाचारों ने अनाज, बागवानी, दूध और मछली उत्पादन में देश की रिकॉर्ड उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के सचिव तथा आईसीएआर के महानिदेशक एमएल. जाट ने 2025-26 के दौरान परिषद की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी और कृषि अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और विस्तार सेवाओं को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की योजना बताई।
इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) नेटवर्क के माध्यम से शोध और तकनीकों की पहुंच बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीकें तेजी से किसानों, पशुपालकों और मछुआरों तक पहुंच सकें।
उन्होंने भरोसा जताया कि पशुपालन और डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हुआ समझौता (एमओयू) शोध, नवाचार और तकनीकों के प्रसार को मजबूत करेगा। इससे किसानों की समृद्धि बढ़ेगी और 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
--आईएएनएस
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