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आईडीबीआई बैंक का विनिवेश जल्द हो सकता है पूरा, आईबीसी संशोधन विधेयक बजट सेशन में होगा पेश: वित्त मंत्री

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार बजट सत्र के दूसरे भाग में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) संशोधन विधेयक लाएगी। साथ ही बताया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश जल्द पूरा हो सकता है।
आईडीबीआई बैंक का विनिवेश जल्द हो सकता है पूरा, आईबीसी संशोधन विधेयक बजट सेशन में होगा पेश: वित्त मंत्री

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सरकार बजट सत्र के दूसरे भाग में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) संशोधन विधेयक लाएगी। साथ ही बताया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश जल्द पूरा हो सकता है।

बजट सत्र का दूसरा भाग 9 मार्च को शुरू होगा।

केंद्रीय बजट 2026-27 के बाद प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विनिवेश की गति और दिशा से आने वाले वर्षों में राजस्व सृजन का आधार तय होना चाहिए।

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, "आगे चलकर और भी अधिक विनिवेश होगा। विशेष रूप से, सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उद्यमों (सीपीएसई) के विनिवेश पर अब गंभीरता से विचार किया जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा कि वह देश के टैक्स आधार को बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं, इससे प्रत्यक्ष कर संग्रह में इजाफा होगा।

वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि आईडीबीआई बैंक का विनिवेश ट्रैक पर है और यह जल्दी पूरा हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री ने पत्रकारों से कहा,"विनिवेश और परिसंपत्ति मुद्रीकरण की गति जारी रहेगी, जिससे सीपीएसई का फ्री फ्लोटिंग बढ़ेगा। मुझे विश्वास है कि आने वाले महीनों में निजी उपभोग का उच्च स्तर बना रहेगा और वित्त वर्ष 2027 के घाटे का लक्ष्य दर्शाता है कि सरकार की प्राथमिकता विकास है।"

बजट में विविध पूंजीगत प्राप्तियों से राजस्व का अनुमान 80,000 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है, जो वित्त वर्ष 2026 के संशोधित अनुमान 33,837 करोड़ रुपए अधिक है। विविध पूंजीगत प्राप्तियों में सरकारी परिसंपत्तियों की बिक्री और मुद्रीकरण दोनों के माध्यम से राजस्व सृजन शामिल है।

वित्त मंत्री ने 2026-27 के बजट में 12.2 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में विकास और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देना है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 2.2 लाख करोड़ रुपए अधिक है।

इस बीच, ऋण-से-जीडीपी अनुपात 2026-27 में जीडीपी का 55.6 प्रतिशत (बजट अनुमान) रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 में यह जीडीपी का 56.1 प्रतिशत (संशोधित अनुमान) था।

--आईएएनएस

एबीएस/

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