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हैदराबाद पुलिस ने 'घोस्ट सिम' नेटवर्क को बनाया निशाना, 13 राज्यों में 66 लोग गिरफ्तार

हैदराबाद, 20 मई (आईएएनएस)। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ हैदराबाद पुलिस ने 'घोस्ट सिम' नेटवर्क का खुलासा किया है। हैदराबाद नगर पुलिस ने 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0' के तहत 13 राज्यों में छापेमारी कर 66 लोगों को गिरफ्तार किया है। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने बुधवार को इस बड़े ऑपरेशन की जानकारी दी।
हैदराबाद पुलिस ने 'घोस्ट सिम' नेटवर्क को बनाया निशाना, 13 राज्यों में 66 लोग गिरफ्तार

हैदराबाद, 20 मई (आईएएनएस)। देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के खिलाफ हैदराबाद पुलिस ने 'घोस्ट सिम' नेटवर्क का खुलासा किया है। हैदराबाद नगर पुलिस ने 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 3.0' के तहत 13 राज्यों में छापेमारी कर 66 लोगों को गिरफ्तार किया है। हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार ने बुधवार को इस बड़े ऑपरेशन की जानकारी दी।

पुलिस के मुताबिक, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन (सीसीपीएस) हैदराबाद ने ऐसे 1,194 'घोस्ट सिम' की पहचान की, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधों में किया जा रहा था। इन सिम कार्ड्स का लिंक विभिन्न साइबर अपराध मामलों से मिला। इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए 18 विशेष टीमों को 13 राज्यों में लगातार सात दिनों तक अभियान चलाने के लिए भेजा गया।

ऑपरेशन के दौरान हैदराबाद शहर से ही 544 सिम कार्ड बरामद किए गए। इनमें 432 सील बंद सिम थे, जिन्हें अभी साइबर अपराधों में इस्तेमाल के लिए एक्टिव नहीं किया गया था।

पुलिस कमिश्नर सज्जनार ने बताया कि इससे पहले 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 1.0' में म्यूल अकाउंट धारकों पर कार्रवाई की गई थी, जबकि 'ऑपरेशन ऑक्टोपस 2.0' में साइबर फ्रॉड में मदद करने वाले बैंक अधिकारियों को निशाना बनाया गया था। अब 'ऑक्टोपस 3.0' के तहत उस 'घोस्ट सिम' नेटवर्क पर कार्रवाई की गई, जो पूरे देश में संगठित साइबर अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने का आधार उपलब्ध कराता था।

पुलिस के अनुसार, 'घोस्ट सिम' ऐसे मोबाइल कनेक्शन होते हैं, जिन्हें आम लोगों के नाम पर धोखाधड़ी से एक्टिव किया जाता है। साइबर अपराधी इन्हीं सिम कार्ड्स का इस्तेमाल अपनी असली पहचान छिपाने के लिए करते हैं।

गिरफ्तार किए गए 66 लोगों में 44 घोस्ट सिम धारक, 20 पीओएएस एजेंट और टेलीकॉम प्रमोटर तथा दो घोस्ट सिम सप्लायर शामिल हैं। गिरफ्तार पीओएस एजेंटों में 10 वोडाफोन आइडिया, 7 एयरटेल और 3 जियो से जुड़े बताए गए हैं।

पुलिस जांच में सामने आया कि कुछ पीओएस एजेंट मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी यानी एमएनपी ईकेवाईसी प्रक्रिया के दौरान, ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके नाम पर अतिरिक्त सिम एक्टिव कर देते थे। बाद में इन सिम को ई-सिम में बदलकर विदेश भेज दिया जाता था, जहां उनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड में होता था।

इतना ही नहीं, कम डिजिटल जानकारी रखने वाले लोगों को मुफ्त सिम एक्टिवेशन का लालच देकर उनके नाम पर सिम लिए जाते थे। फिर कमीशन के बदले इन्हें साइबर फ्रॉड नेटवर्क को सप्लाई कर दिया जाता था। कई मामलों में ग्राहकों को पैसे देकर उनके सिम कार्ड सरेंडर करवाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि एजेंट लोगों से ओटीपी लेकर व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया, डेटिंग और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म पर फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। गांवों में मुफ्त सिम वितरण के नाम पर कैंप लगाकर अशिक्षित लोगों के आधार कार्ड का दुरुपयोग किया गया।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार 66 लोग देशभर में दर्ज 76 साइबर अपराध मामलों से जुड़े हैं, जिनमें करीब 101.87 करोड़ रुपए की ठगी हुई है।

सज्जनार ने कहा कि यह अभियान साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। पिछले छह महीनों से हैदराबाद पुलिस बैंकिंग और रेगुलेटरी संस्थाओं के साथ लगातार बैठकें कर रही है ताकि साइबर फ्रॉड रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जा सके।

अब हैदराबाद पुलिस एयरटेल, जियो और वोडाफोन आइडिया जैसी टेलीकॉम कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष बैठकें करेगी। इसके अलावा पुलिस दूरसंचार विभाग, ट्राई और अन्य एजेंसियों से भी संपर्क करेगी ताकि केवाईसी प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जा सके और साइबर अपराधियों के लिए 'घोस्ट सिम' हासिल करना मुश्किल हो सके।

--आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम

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