तिब्बती बौद्ध धर्म पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए कर्मापा से संपर्क में सीसीपी: रिपोर्ट
ल्हासा, 25 सितंबर (आईएएनएस)। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) का यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट (यूएफडब्ल्यूडी) तिब्बती बौद्ध धर्म पर अपनी पकड़ मजबूत करने और उसे चीनी राज्य व्यवस्था के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से 17वें कर्मापा ओग्येन त्रिनले दोर्जे के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। यह दावा द तिब्बत एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट में किया गया है।
रिपोर्ट के लेखक और 14वें दलाई लामा के भतीजे खेदरूब थोंदुप के अनुसार, यूएफडब्ल्यूडी कर्मापा और उनके माता-पिता की हांगकांग में मुलाकातें करवाने के साथ-साथ उनके भविष्य को लेकर नियमित सलाह भी दे रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इस प्रक्रिया के जरिए कर्मापा पर प्रभाव बनाए रखना चाहता है।
ओग्येन त्रिनले दोर्जे तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं में से एक हैं। उन्हें दलाई लामा और चीन, दोनों ने 17वें कर्मापा के रूप में मान्यता दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन तिब्बती बौद्ध समुदाय के भीतर एक प्रभावशाली सहयोगी तैयार करना चाहता है, ताकि धार्मिक संस्थानों और तिब्बत क्षेत्र पर उसका नियंत्रण और मजबूत हो सके।
रिपोर्ट के मुताबिक, यूएफडब्ल्यूडी की सलाह में कर्मापा के सार्वजनिक बयान, यात्रा कार्यक्रम और अन्य धार्मिक नेताओं से मुलाकात जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। दावा किया गया है कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कर्मापा सीसीपी के राजनीतिक उद्देश्यों के अनुरूप रहें और तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन या चीन की नीतियों के खिलाफ किसी गतिविधि का समर्थन न करें।
रिपोर्ट में इसे चीन की व्यापक सांस्कृतिक और धार्मिक समावेशन रणनीति का हिस्सा बताया गया है, जिसके प्रभाव तिब्बत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पर पड़ सकते हैं।
रिपोर्ट में मई 2026 में इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (आईसीटी) द्वारा जारी बयान का भी उल्लेख किया गया है। आईसीटी ने चीन से 11वें पंचेन लामा गेधुन चोएक्यी न्यिमा को तत्काल रिहा करने और उनके अधिकार बहाल करने की मांग की थी।
आईसीटी के अनुसार, दलाई लामा द्वारा 1995 में छह वर्षीय गेधुन चोएक्यी न्यिमा को पंचेन लामा के रूप में मान्यता दिए जाने के कुछ दिनों बाद चीनी अधिकारियों ने उन्हें और उनके परिवार को हिरासत में ले लिया था। संगठन का कहना है कि तब से वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दिए हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने बाद में ग्याल्त्सेन नोर्बू को पंचेन लामा नियुक्त किया, जिसे निर्वासित तिब्बती समुदाय स्वीकार नहीं करता। यह दावा आईसीटी और रिपोर्ट में उद्धृत स्रोतों के हवाले से किया गया है, जबकि चीन इन मामलों पर अलग आधिकारिक रुख रखता है।
--आईएएनएस
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