एचएमटी भूमि विवाद: कुमारस्वामी का कांग्रेस सरकार पर हमला, बोले- निजी हाथों में गई जमीन
बेंगलुरु, 16 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को बेंगलुरु की एचएमटी (हिंदुस्तान मशीन टूल्स) भूमि के कथित हस्तांतरण को लेकर कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1999 से 2004 के बीच तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 175 एकड़ एचएमटी भूमि को निजी हाथों में जाने दिया गया। उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार राज्य के शहरी विकास मंत्री थे।
बेंगलुरु में एचएमटी की विभिन्न भूमि का निरीक्षण करने के बाद कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों को कथित अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, "रिपोर्ट मिलते ही उचित कार्रवाई की जाएगी और पूरे मामले की गहन जांच शुरू की जाएगी।"
कुमारस्वामी ने एचएमटी की कथित भूमि पर बने एक्विला हाइट्स, गोवियानु एरिटिस, प्रेस्टिज केंसिंग्टन गार्डन्स और केकेआर एएमआर रूबी अपार्टमेंट्स सहित कई आवासीय परिसरों का दौरा किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि एचएमटी के कुछ पूर्व अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से यह भूमि निजी हाथों में चली गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या कर्नाटक सरकार इस कथित अतिक्रमित जमीन को वापस लेने के लिए तैयार है।
कुमारस्वामी ने बिना नाम लिए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर निशाना साधते हुए कहा, "जो व्यक्ति आज बिदादी टाउनशिप परियोजना को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है, वही 1999 से 2004 के बीच शहरी विकास मंत्री रहते हुए एचएमटी की बहुमूल्य जमीन निजी हाथों में जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।"
उन्होंने नक्शे और दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया कि उनके पास उन लोगों का पूरा ब्योरा है, जिन्हें इन भूमि सौदों का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि कर्नाटक की जनता को यह जानने का अधिकार है कि इन सौदों को किसने मंजूरी दी और इससे किसे फायदा हुआ।
कुमारस्वामी ने पूर्व वन मंत्री ईश्वर खंड्रे को भी चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार गंभीर है तो वह ऊंची इमारतों से घिरी कथित एचएमटी भूमि को वापस लेकर दिखाए। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसरो (आईएसआरओ) जैसे राष्ट्रीय संस्थानों को एचएमटी भूमि आवंटित किए जाने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने कहा कि वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने एचएमटी की भूमि के आगे हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा, "मैंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एचएमटी की कोई अतिरिक्त जमीन न बेची जाए और न ही उसका पंजीकरण किया जाए। इसी फैसले की वजह से आज भी एचएमटी की बड़ी भूमि सुरक्षित बची हुई है।"
कुमारस्वामी ने कहा कि विवादित जमीन पर बने अपार्टमेंट्स में रहने वाले कई लोगों को खाता और ई-खाता प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया, "अगर सब कुछ कानूनी तरीके से हुआ था तो राज्य सरकार ने अब तक इन संपत्तियों को नियमित क्यों नहीं किया?"
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि जब केंद्र सरकार एचएमटी के पुनरुद्धार के लिए पैकेज तैयार कर रही है और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार हो चुकी है, तब कुछ स्वार्थी तत्व इसमें बाधाएं पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एचएमटी भूमि विवाद फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और सभी पक्षों को सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी के पुनरुद्धार में सहयोग करना चाहिए, ताकि इसकी मूल्यवान औद्योगिक भूमि निजी हितों के हाथों में न जाए।
--आईएएनएस
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