हिमाचल प्रदेश: जय राम ठाकुर ने बजट को निराशाजनक और दिशाहीन बताया
शिमला, 21 मार्च (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने शनिवार को राज्य के बजट को राज्य के इतिहास का सबसे निराशाजनक और दिशाहीन बताया, जिसमें जनता के लिए कुछ भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि बजट लगातार उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। 2023-24 में राजकोषीय घाटा क्रमशः 10,300 करोड़ रुपए, 10,337 करोड़ रुपए, 12,414 करोड़ रुपए और 9,896 करोड़ रुपए रहा।
इन वर्षों के दौरान, पूंजी निवेश घटकर 6,781 करोड़ रुपए, 6,239 करोड़ रुपए, 3,941 करोड़ रुपए और 3,089 करोड़ रुपए रह गया।
2025-26 का मुख्य बजट 58,514 करोड़ रुपए था, जबकि चालू वित्त वर्ष का बजट 54,928 करोड़ रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3,586 करोड़ रुपए कम है।
ठाकुर ने कहा कि यह 6.13 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
उन्होंने आगे कहा कि विश्व भर में बजट अनुमान आमतौर पर प्रगति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, लेकिन सुक्खू सरकार द्वारा प्रस्तुत यह बजट केवल राज्य को पीछे धकेलने वाला दस्तावेज बनकर रह गया है।
उन्होंने बताया कि यह बजट लगभग सुक्खू सरकार के पहले बजट के बराबर है, जो 53,412 करोड़ रुपए का था।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार के वित्तीय प्रबंधन की सच्चाई अब सबके सामने आ गई है। सरकार केवल कर्मचारियों के वेतन में कटौती करने के लिए काम कर रही है।
ठाकुर ने सरकार पर व्यवस्था परिवर्तन के नारे लगाने का आरोप लगाया, जबकि सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को बदतर स्थिति में धकेल रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट भाषण में की गई घोषणाएं, पिछली घोषणाओं की तरह, या तो धूल फांकेंगी या फिर चुनावी वादे बनकर रह जाएंगी।
उन्होंने पूरक बजट में उजागर हुए बजट अनुमानों में विसंगतियों की ओर इशारा किया। सरकार कन्यादान योजना के लिए आवंटित धनराशि का 10 प्रतिशत भी उपयोग करने में विफल रही।
इसी तरह, वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में शगुन योजना की धनराशि का केवल 17 प्रतिशत और महिला सम्मान निधि के आवंटन का केवल 3.7 प्रतिशत ही उपयोग किया गया।
इसी तरह, जैविक खेती की पहल भी विज्ञापनों तक ही सीमित रह गई, क्योंकि सरकार ने केवल 1,643 किसानों से 2.69 करोड़ रुपए की उपज खरीदी।
इन योजनाओं पर सैकड़ों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद लाभार्थियों को प्रति किसान 14,000 रुपए भी नहीं मिले।
--आईएएनएस
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